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mp election 2023 खंडवा में विधायक ने पहचानने से कर दिया इंकार उन्हें मिली बीजेपी की टिकट

भाजपा ने विधानसभा चुनाव में मौजूदा विधायक का टिकट काटकर पहली बार महिला प्रत्याशी को मौका दिया है। खंडवा विधानसभा सीट पर अब तक हुए 15 चुनाव और एक उपचुनाव हुए, लेकिन भाजपा से हमेशा पुरुषों को ही मौका मिलता रहा है। हालांकि यह मौका भाजपा ने पार्टी की अंतरकलह को थामने के लिए दिया।

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खंडवा विधानसभा सीट

खंडवा. भाजपा ने विधानसभा चुनाव में मौजूदा विधायक का टिकट काटकर पहली बार महिला प्रत्याशी को मौका दिया है। खंडवा विधानसभा सीट पर अब तक हुए 15 चुनाव और एक उपचुनाव हुए, लेकिन भाजपा से हमेशा पुरुषों को ही मौका मिलता रहा है। हालांकि यह मौका भाजपा ने पार्टी की अंतरकलह को थामने के लिए दिया। अनुशासित पार्टी मानी जाने वाली भाजपा में पहली बार कार्यकर्ता मौजूदा विधायक के टिकट का विरोध करने के लिए भोपाल पहुंचे थे। प्रदर्शन किया, जिसके चलते पार्टी को अपना निर्णय बदलना पड़ा। ऐसा ही हाल पंधाना विधायक राम दांगोरे का भी रहा। सर्वे में उनकी निष्क्रियता और कार्यकर्ताओं के विरोध ने उनका टिकट छीन लिया।

जिला पंचायत चुनाव से बढ़ती गई प्रतिद्वंदिता
विधायक वर्मा और कंचन तनवे के बीच प्रतिद्वंदिता जिला पंचायत चुनाव से ही शुरू हो गई थी। विधायक वर्मा ने जिपं के चुनाव में अपने समर्थक को टिकट दिलाने के लिए तनवे को पहचानने से इनकार कर दिया था। कंचन बगावत कर मैदान में उतरीं और जिपं अध्यक्ष बनीं। इसके बाद से विधायक और जिपं अध्यक्ष के बीच कोल्ड वॉर शुरू हुई जो वर्मा के टिकट काटने तक पहुंच गई।

वर्मा समर्थकों ने विधानसभा कार्यकर्ता सम्मेलन में कंचन तनवे के पोस्टर-बैनर तक फाड़े। विकास यात्रा के शुभारंभ पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकऱी, प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा, सीएम शिवराजसिंह चौहान की मौजूदगी में मंच संचालन कर रहे विधायक वर्मा ने जिपं अध्यक्ष का नाम तक नहीं पुकारा। सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल और महापौर अमृता यादव भी कंचन तनवे के समर्थन में आ गए।

पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के सामने खंडवा में और केंद्रीय मंत्री नरेंद्रसिंह तोमर के भोपाल स्थित निवास पर वर्मा के खिलाफ नारे भी लगे। इसका लाभ टिकट की दावेदारी कर रही कंचन को मिला।

प्रदेशाध्यक्ष की नजदीकियां भी नहीं आई काम
पंधाना विधानसभा से 2018 में विधायक बनने के बाद राम दांगोरे को 2023 में भी मौका मिलने की उम्मीद थी। शुरुआत से उनकी कार्यशैली को लेकर सवाल उठते रहे। क्षेत्र में विकास कार्य, कार्यकर्ता के बीच पहुंच, प्रतिद्वंदियों पर कार्रवाई आदि को लेकर कार्यकर्ताओं में विरोध रहा। उनके विरोधियों की तादात इतनी बढ़ गई कि इसकी आवाजा भोपाल तक पहुंचने लगी।

इस बीच कांग्रेस से भाजपा में आईं छाया मोरे के रूप में पार्टी को बेहतर विकल्प मिला। प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा से दांगोरे की नजदीकियां भी काम नहीं आई और पार्टी ने राम का टिकट काट दिया।

पहली विधायक थी नंदा मंडलोई
खंडवा विधानसभा सीट पर पहली बार भाजपा ने महिला को मौका दिया है। अब तक हुए 15 चुनाव और एक उपचुनाव में भाजपा से पुरुषों की ही भागीदारी रही थी। जबकि 1980, 85 और 90 में कांग्रेस ने तीन बार नंदा मंडलोई को मौका दिया था। 1985 में नंदा मंडलोई कांग्रेस से पहली विधायक भी रहीं।

भाजपा ने पहली बार महिला उम्मीदवार के तौर पर खंडवा में कंचन तनवे को मौका दिया है। जबकि पंधाना में भाजपा से योगिता बोरकर विधायक रह चुकी है। पिछली बार कांग्रेस से छाया मोरे और निर्दलीय रही रूपाली बारे इस बार फिर प्रतिद्वंदी के रूप में आमने सामने है। इस बार छाया मोरे भाजपा से तो रूपाली बारे कांग्रेस से मैदान में है।

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