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नर्मदा परिक्रमा धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं, आध्यात्मिक यात्रा है…

मां नर्मदा जयंती विशेष...-मैया के सतत ध्यान में रहते, यानि आत्मा शिवत्व के अति समीप-पांच बार पूर्ण नर्मदा परिक्रमा करने वाले भोजपाली बाबा ने बताए अपने अनुभव

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खंडवा

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Manish Arora

Feb 16, 2024

नर्मदा परिक्रमा धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं, आध्यात्मिक यात्रा है...

खंडवा. नर्मदा परिक्रमा के दौरान मां नर्मदा को निहारते भोजपाली बाबा।

मां नर्मदा की पंच पद परिक्रमा करने का सौभाग्य प्राप्त करने के पश्चात मेरी तो यही अनुभूति है कि ये एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं है कि आपने झोला उठाया और कर आए पैदल 3000 किमी की परिक्रमा। नहीं.. ये धार्मिक न होकर आध्यात्मिक यात्रा है। चाहे चार माह लगे या 3 साल, आप उतने समय सतत मैया के ध्यान में रहते है यानि आत्मा शिवत्व के अति समीप। वो जल नहीं बह रहा, भोलेनाथ का पसीना बह रहा है, ईश्वरत्व बह रहा है।

यह अनुभव है पांच बार मां नर्मदा की पूर्ण परिक्रमा करने वाले रेवा अवधूत भोजपाली बाबा उर्फ रवींद्र गुप्ता का। मां नर्मदा परिक्रमा से बाबा किस तरह से जुड़े यह स्वयं बाबा की जुबानी जानिए।

मैं रवींद्र गुप्ता, निवासी भोपाल, अब मां नर्मदा का तट, संघ से जुड़ा, 1992 में श्रीराम मंदिर के लिए अयोध्या में कार सेवा की। डबल एलएलबी कर भोपाल में अधिवक्ता के रूप में कार्य करता रहा। बजरंग दल विहिप का पूर्ण कालिक सदस्य हूं, वर्ष 2007 में विहिप जिला संगठन मंत्री के रूप में खरगोन पहुंचा। यहां मां नर्मदा से असली परिचय हुआ। इससे पूर्व सिर्फ सोमवती अमावस्या पर ही मां नर्मदा के दर्शन करने आते रहे थे। खरगोन में जिला संगठन के पद पर कार्य करते हुए मां नर्मदा का महत्व जाना। 2009 में मां नर्मदा की परिक्रमा का संकल्प लिया, लेकिन मां ने पहली बार 2012 में अपने सानिध्य में बुलाया।

पहली परिक्रमा 118 दिन में हुई पूरी
पहली बार मां नर्मदा की परिक्रमा 2012 में ओंकारेश्वर से आरंभ की। 2600 किमी की यात्रा में 118 दिन लगे। इसके बाद कई बार ओंकार पर्वत और नागद्वार पर्वत की यात्रा भी करता रहा। दूसरी पूर्ण यात्रा वर्ष 2015-16 में की। तीसरी यात्रा 2017-18 में ओंकारजी से ही शुरू की। चौथी यात्रा वर्ष 2019-20 में बरबान उत्तर तट से और पांचवीं यात्रा 2022-23 में नर्मदापुरम दक्षिण तट से शुरू की। पांचवीं यात्रा में एक साल लगा, यात्रा के दौरान चातुर्मास भी किया, इस दौरान माताजी का देहांत होने की खबर भी आई, भोपाल जाना पड़ा। वहां से लौटकर फिर यात्रा पूर्ण की।

विश्व की एक मात्र नदी जिसकी परिक्रमा होती
मां नर्मदा विश्व की एकमात्र ऐसी नदी है, जिसकी परिक्रमा की जाती है। स्कंदपुराण में नर्मदा का वर्णन किया गया है। माना जाता है कि पैदल यात्रा करने पर यह यात्रा 3 साल 3 महीने और तेरह दिन में पूरी होती है। इसके लिए कुल 2600 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। कई यात्री 120 दिन में परिक्रमा पूरी करते है।

यह है परिक्रमा पथ
मां नर्मदा की परिक्रमा का आरंभ उद्गम स्थल अमरकंटक से शुरू होकर गुजरात भरूच तक 1312 किमी और फिर भरूच से अमरकंटक तक 1312 किमी की होती है। यात्रा तभी पूर्ण होती है जब आप ओंकारजी को जल अर्पित करते है, इसलिए अधिकतर लोग अपनी यात्रा ओंकारेश्वर से ही शुरू करते है। कई यात्री वाहनों से भी मां नर्मदा की परिक्रमा करते है।

हजारों आश्रम, अनवरत सदाव्रत
मां नर्मदा परिक्रमा मार्ग पर हजारों आश्रम और सदाव्रत (यात्रियों के लिए कच्चा भोजन) उपलब्ध होता है। नर्मदा तट पर पडऩे वाले गांवों में भी परिक्रमावासियों के लिए भंडारा प्रसादी और सदाव्रत की व्यवस्था ग्रामीणों, संत-महात्माओं द्वारा की जाती है।


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