
प्रशिक्षण देकर पटवारियों को बताया कैसे होंगे कार्य
खंडवा. नगर निगम का वित्तीय प्रबंधन बुरी तरह से गड़बड़ाया हुआ है। इसकी बड़ी वजह यहां के जिम्मेदार बने हुए हैं। इस वित्तीय वर्ष में अब तक अकेले निगम मद में ही करीब पौने तीन सौ टेंडर लग चुके हैं लेकिन एक में भी आदेश का पालन नहीं किया गया है। आदेश ये है कि पूरी फाइल ऑनलाइन चलना है लेकिन यहां सबकुछ ऑफलाइन हो रहा है।
निगम मद के माध्यम से यहां करोड़ों के काम निकाले जा रहे हैं जबकि फंड की कमी बनी हुई है। वसूली का प्रतिशत बहुत कमजोर है। बावजूद लगातार टेंडर लगाए जाने के लिए फाइलों पर आयुक्त हिमांशु सिंह द्वारा हस्ताक्षर किए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2019-20 में निगम मद से 263 टेंडर लग चुके हैं। सभी के लिए ऑफलाइन प्रक्रिया अपनाई गई। पूरा काम होने के बाद फाइल ऑनलाइन चढ़ाई गई है।
ऐसे ऑनलाइन शुरू हो जाना चाहिए प्रक्रिया
पार्षद या क्षेत्रवासियों का डिमांड पत्र मिलने के बाद ऑनलाइन डिमांड जनरेट होना चाहिए। एई, ईई स्तर से आगे बढऩे के बाद आयुक्त द्वारा अप्रूव्ड होने के बाद डिमांड नंबर जनरेट हो, प्रोजेक्ट नंबर मिलता है। एस्टीमेट भी सॉफ्टवेयर में फीड है, उसमें सिर्फ मेजरमेंट डालना पड़ेंगे। चूंकि ऑनलाइन बजट हेड होते हैं तो उसमें से हर काम के बाद वो कम होते जाएगा, इस तरह पता चल जाएगा कि नए कामों के लिए बजट कितना शेष है। उस हिसाब से ही काम होंगे।
18 करोड़ के टेंडर लगा चुके चुके हैं अबतक
नगर निगम में हर वर्ष करीब 22 करोड़ रुपए के आसपास डिमांड जनरेट होती है लेकिन बड़ी बात तो ये है कि इस वित्तीय वर्ष में 18 करोड़ रुपए से ज्यादा के टेंडर लगाए जा चुके हैं, जबकि फाइलें अब-भी तैयार हो रही हैं। पार्षदों व जनप्रतिनिधियों के दबाव में काम कर रहे अफसर विकास कार्यों की प्राथमिकताओं का भी ध्यान नहीं रख रहे हैं। यही वजह है कि कई हेड में तय से ज्यादा बजट के टेंडर निकाले जा चुके हैं।
शासन के आदेशों का खुलेआम कर रहे उल्लंघन
संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास मप्र भोपाल की ओर से ऑनलाइन प्रक्रिया के संबंध में आदेश जारी हुए हैं। अपर आयुक्त आशीष सक्सेना के निर्देशों का मजमून ये है कि इ-नगर पालिका के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक मोड पर डाटा का संधारण हो। हस्तलिखित लेखा संधारण को समाप्त किया जाए। माड्यूल के संबंध में बकायदा ट्रेनिंग भी हो चुकी है लेकिन यहां जिम्मेदार संचालनालय के निर्देशों का ही खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं।
- अगर ऑनलाइन सब चलाने लगेंगे तो कैसे हो पाएगा काम
टेंडर करने में तो तीन महीने लग रहे हैं। एक फाइल को लोड करने में कम से कम आधा घंटा या 45 मिनट लगता है। अगर 10 टेंडर दिनभर में करना हो तो 10 घंटे चाहिए। अगर ऑनलाइन सब चलाने लगेंगे तो फिर तो हो ही नहीं पाएगा। फाइल इसलिए तैयार करके रख रहे हैं, क्योंकि टेंडर करने के बाद वर्कऑर्डर अपलोड होगा तो उसी के साथ फाइल नंबर तैयार हो जाएगा। उसी के आधार पर भुगतान होगा। अभी पूरी फाइल ही स्कैन होकर अपलोड हो जाती है। एक प्रक्रिया ये होती है कि पूरी फाइल ही ऑनलाइन चले। सबके कंसोल में डाल देंगे। इइ, आयुक्त ओके कर दे। उसके बाद टेंडर निकल जाए।
हिमांशु सिंह, आयुक्त, ननि
Published on:
25 Oct 2019 04:09 pm
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