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खंडवा

‘रक्षेन्द्र पतन’ में खलनायक नहीं प्रतिनायक है रावण

उदयन के काव्य का आज होगा विमोचन, किशोर कुमार सभागृह में होगा समोराह

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खंडवा. रामायण के जिस रावण को आप जानते हैं, उसकी व्याख्या कुछ अलग तरीके से की गई है। रावण को काव्य ‘रक्षेन्द्र पतन’ में खलनायक नहीं बल्कि प्रतिनायक बताया गया है। स्व. शंकर प्रसाद दीक्षित ‘उदयन’ का यह काव्य का अब अंतिम रूप मिलने के बाद विमोचन को तैयार है। स्व. की 43वीं पुण्यतिथि के मौके पर इस पुस्तक का विमोचन समारोह पूर्वक 22 नवंबर की शाम 5 बजे रविन्द्र भवन किशोर कुमार सभागृह में किया जाएगा।
कुशल प्रशासक थे दीक्षित
स्व.शंकर प्रसाद दीक्षित शिक्षा विभाग में कुशल प्रशासक रहे। सन 1946 में खंडवा शहर के शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से शिक्षक के रूप में जीवन प्रारंभ कर वर्ष 1956 में राजपत्रित अधिकारी के रूप में पदोन्नत होकर जिला ग्रंथपाल एवं वर्ष 1965 में ही जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर आसीन हुए। साहित्य में विशेष रूचि होने से वर्ष 1964 में उन्होंने ‘रक्षेन्द्र पतन’ काव्य की रचना शुरू की।
वनिता ने संभाला जिम्मा
स्व. दीक्षित के पुत्र हर्ष वर्धन दीक्षित, शान्तनु दीक्षित ने बताया, 22 नवम्बर 1979 को उनके पिता का असमय स्वर्गवास हो गया। इसके बाद यह अपूर्ण काव्य पन्नों में सिमटा रखा रहा। वर्ष 2003 में हर्ष वर्धन ने इसे पढ़ा और उन्हें लगा कि अपूर्ण है तो काव्य के शेष भाग को पूर्ण करने के लिए पारिवारिक सदस्य डॉ. वनिता बाजपेयी, अध्यक्ष हिन्दी विभाग, विदिशा का सहयोग लिया। वनिता ने वर्ष 2014 में इस काव्य को पूर्ण करने की जिम्मेदारी ली। फिर 14 महीने में इस काव्य को पूर्ण किया है।
विमोचन में यह होंगे अतिथि
इस महाकाव्य के विमोचन में मुख्य अतिथि डॉ. वेद प्रताप वैदिक, विशेष अतिथि डॉ. प्रभु नारायण मिश्र, डॉ. नीलिम्प त्रिपाठी होंगे। दीक्षित परिवार के सदस्यों ने बताया कि 620 पृष्ठ की इस पुस्तक के प्रकाशक 1.6 टेक्नालॉजी (विकम सेक्सपियर) मुंबई हैं। यह पुस्तक बाजार में 700 रुपए कीमत पर उपलब्ध होगी। जबकि प्रकाशक ने विमोचन अवसर पर पुस्तक की कीमत 400 रुपए रखी है।