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गरीबों की थाली में रोटी की मात्रा घटाई, चावल का कोटा बढ़ाया

बाजार भाव ज्यादा होने से किसानों ने मंडी में बेची उपज, कई जिलों में सरकारी खरीदी केंद्रों के नहीं खुले खाते, सरकारी वितरण में चावल का कोटा बढ़ाया

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 Reduced the quantity of roti, increased the quota of rice

Reduced the quantity of roti, increased the quota of rice

खंंडवा. सरकार ने गरीबों की थाली में रोटी की मात्रा घटा दी, अब उन्हें ज्यादा चावल खाना पड़ेगा। समर्थन मूल्य पर कम खरीदी और सरकारी भंडार गृहों में गेहूं की कमी के चलते यह फैसला लिया गया है। मध्यप्रदेश के साथ दिल्ली, बिहार, केरल और पश्चिम बंगाल में गेहूं का कोटा कम कर चावल अधिक देने का फैसला किया है। इस वर्ष मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर लक्ष्य से करीब 75 फीसदी कम खरीदी हुई। किसानों ने अच्छा भाव मिलने के चलते बाजार में पूरा गेहूं बेच दिया। जिससे सरकार के भंडारगृह खाली ही रह गए। खंडवा स्थिति मप्र का सबसे बड़ा वेयरहाउस भी 80 फीसदी तक खाली पड़ा है।
आधा किया गेहूं, तीन गुना बढ़ाया चावल
गरीबों को शासकीय राशन दुकानों से प्रति माह एक व्यक्ति को चार किलो गेहूं और एक किलो चावल मिलता था, लेकिन सरकार ने चावल का कोटा बढ़ा दिया है। इसके चलते अब तीन किलो चावल और सिर्फ दो किलो गेहूं मिल रहा है। सामान्यत: लोग चावल का कम उपयोग करते हैं और रोटी अधिक खाते हैं, लेकिन सरकार आदेश जारी कर गेहूं की मात्रा कम कर दी है। इससे गरीब परेशान हैं, चावल की गुणवत्ता को लेकर भी अलग-अलग शिकायतें शासन को मिलने लगी है।
वैश्विक स्तर पर गेहूं की मांग बढ़ी
वैश्विक स्तर पर गेहूं की मांग बढऩे के बाद सरकार ने देश के किसानों के लिए निर्यात की अनुमति जारी की, इसके चलते अचानक ही गेहूं के भाव समर्थन मूल्य से 400 रुपए तक ज्यादा हो गए थे। इसके चलते किसानों ने पूरी उपज मंडी में बेच दी। विदेशों में अच्छा भाव मिलने के चलते व्यापारियों ने ऊंचे भाव में खरीदी की, जिसका प्रभाव हुआ कि किसान खरीदी केंद्रों तक नहीं पहुंचे। कई जिले एक भी दाना नहीं खरीद पाए, कुछ अन्य जिलों में भी खरीदी केंद्र की शुरुआत ही नहीं हो पाई।
निर्यात रोका, खरीदी शुरू करवाई
कीमतें नियंत्रण से बाहर होती देख सरकार ने 15 मई को निर्यात पर रोक लगा दी, जिससे बाजार में गेहूं की कीमतें धड़ाम हो गईं। खरीदी की समय सीमा भी बढ़ाई गई जिसके बाद कुछ किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचा। सरकार ने सरकाररी खरीदी का लक्ष्य 129 लाख मीट्रिक टन तय किया था लेकिन सिर्फ 41 लाख मीट्रिक टन की खरीदी हो पाई है। इसमें एफसीआई का हिस्सा अलग है। पूरे प्रदेश में अभी तक 30 लाख मीट्रिक टन गेहूं का वितरण प्रतिवर्ष होता है। मध्यप्रदेश अन्य राज्यों को भी आपूर्ति करता है, लेकिन इस बार प्रदेश में ही वितरण करने के लिए गेहूं का संकट हो सकता है। सरकार चावल वितरण की मात्रा बढ़ाने के पीछे गेहूं की बचत करना और खजाने के बोझ को कम करना बताया जा रहा है।

इन जिलों में नहीं खुला खाता
मुरैना, भिंड, ग्वालियर और बुरहानपुर

इन जिलों में सर्वाधिक खरीदी
सीहोर - 456678.65
विदिशा - 451057.92
रायसेन - 430294.12
नर्मदापुरम - 423428.85
आंकड़े मीट्रिक टन में