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जानिए तिरंगे के बारे में…कब होता है बर्थडे, क्या है रंगों का महत्व

तिरंगे का आकार कैसा होना चाहिए, तिरंगा फहराने की महत्वपूर्ण तिथियां क्या है? ये सभी यहां इस रिपोर्ट में जानिए...।

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खंडवा

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Amit Jaiswal

Jan 09, 2018

republic day event 2018 : indian flag colours and their meaning

republic day event 2018 : indian flag colours and their meaning

खंडवा. 26 जनवरी को देश का संविधान लागू किया गया तो इसमें हर नागरिक को अधिकार भी दिए गए। गणतंत्र दिवस का अवसर ऐसा होता है, जब हमें अधिकार तो याद रहने चाहिए लेकिन ये भी जरूरी है कि हम कर्तव्यों को ना भूलें। गणतंत्र दिवस के खास मौके पर तिरंगे बारे में भी जानना बहुत जरूरी है। तिरंगे का निर्माण कब हुआ, कैसे उसकी यात्रा आगे बढ़ी। तिरंगे का आकार कैसा होना चाहिए, तिरंगा फहराने की महत्वपूर्ण तिथियां क्या है? ये सभी यहां इस रिपोर्ट में जानिए...।


जाने तिरंगे के बारे में...
22 जुलाई 1947 को नियमानुसार, तिरंगे ध्वज का निर्माण किया गया जो कि राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का जन्म दिवस है। तिरंगे ध्वज के निर्माण के बाद पं. जवाहरलाल नेहरू द्वारा अंतिम वायसराय लार्ड माउंटबेटेन के समक्ष राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान का प्रस्ताव रखा गया। 14 अगस्त 1947 को रात 10 बजे सेंट्रल हॉल दिल्ली में अंतिम वायसराय लार्ड माउंटबेटेन ने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत के संविधान संबंधी दस्तावेज सौंपे। रात 12 बजे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हंसाबेन मेहता ने खादी सिल्क के तिरंगे ध्वज को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को सौंपा। सेंट्रल हॉल में ही तिरंगे का प्रथम ध्वजारोहण किया गया। 15 अगस्त की शाम को पं. जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रिसेंस पार्क इंडिया गेट के पास दिल्ली में प्रथम सार्वजनिक राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का ध्वजारोहण किया और भारत की आजादी का जश्न लाखों लोगों ने मनाया।


ऐसा होना चाहिए ध्वज
- तिरंगे का आकार आयताकार हो, जिसकी लंबाई व चौड़ाई तीन अनुपात में हो
- ध्वज हाथ से काते हुए सूत के धागे से चरखे पर बुनी हुई खादी का हो
- रंग क्रमानुसार केसरिया, सफेद और हरा हो
- सफेद रंग की चौड़ाई के अनुरूप परिधि लेते हुए मध्य में 24 सलाखों वाला नीले रंग का चक्र हो
- ध्वज के एक वर्गफुट खादी के कपड़े का वजन 205 ग्राम हो


तिरंगे के सम्मान का रखें ध्यान
-ध्वज सूर्योदय के बाद फहराए तथा सूर्यास्त के पूर्व इसे सम्मानपूर्वक उतार लें
-ध्वज उतारते समय इसे भूमि या पानी का स्पर्श न होने दें
- ध्वज भाषण दे रहे वक्ता के डायस या टेबल पर दाहिने तरफ ही होना चाहिए
-भाषण दे रहे वक्ता के पीछे ध्वज दीवार पर होने की स्थिति में हरा रंग कंधे से ऊपर हो
-शहीदों के सम्मान में राष्ट्रीय ध्वज ओढ़ाने के समय केसरिया रंग कंधे की ओर, सफेद रंग पेट पर एवं हरा रंग जंघा पर रहना चाहिए
-जब भी झंडा फहराया जाए तो उसे सम्मानपूर्ण स्थान दिया जाए। उसे ऐसी जगह लगाया जाएए जहां से वह स्पष्ट रूप से दिखाई दे
- सरकारी भवन पर झंडा रविवार और अन्य छुट्टियों के दिनों में भी सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाता है, विशेष अवसरों पर इसे रात को भी फहराया जा सकता है
-- झंडा किसी अधिकारी की गाड़ी पर लगाया जाए तो उसे सामने की ओर बीचोंबीच या कार के दाईं ओर लगाया जाए
- फटा या मैला झंडा नहीं फहराया जाता है। झंडा केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ही आधा झुका रहता है
-किसी दूसरे झंडे या पताका को राष्ट्रीय झंडे से ऊंचा या ऊपर नहीं लगाया जाएगा, न ही बराबर में रखा जाएगा
- झंडे पर कुछ भी लिखा या छपा नहीं होना चाहिए। जब झंडा फट जाए या मैला हो जाए तो उसे एकांत में पूरा नष्ट किया जाए


बिगुल की आवाज के साथ ही फहराएं और उतारें
झंडे को सदा स्फूर्ति से फहराया जाए और धीरे-धीरे आदर के साथ उतारा जाए। फहराते और उतारते समय बिगुल बजाया जाता है तो इस बात का ध्यान रखा जाए कि झंडे को बिगुल की आवाज के साथ ही फहराया और उतारा जाए। जब झंडा किसी भवन की खिड़की, बालकनी या अगले हिस्से से आड़ा या तिरछा फहराया जाए तो झंडे को बिगुल की आवाज के साथ ही फहराया और उतारा जाए।


तिरंगा फहराने की महत्वपूर्ण तिथियां
15 अगस्त- स्वतंत्रता दिवस
26 जनवरी- गणतंत्र दिवस
6 से 13अप्रैल- राष्ट्रीय सप्ताह
1नवंबर- मप्र का स्थापना दिवस


ध्वज खराब हो जाए तो ये करें
- ध्वज खराब होने पर उसे यहां-वहां न फेंके। उसे गोपनीय तरीके से सम्मानपूर्वक अग्नि प्रवेश कराएं तथा राख को रेत में मिलाकर सम्मान के साथ किसी नदी के जल में बहाएं।


यह है तिरंगे के रंगों का महत्व
केसरिया रंग-सूर्योदय के समय सूर्य का रंग केसरिया होता है, अर्थात यह रंग प्रकाश का प्रतीक माना गया है।
सफेद रंग- अमन एवं शांति का प्रतीक सर्वधर्म समभाव एवं भाईचारे का प्रतीक माना गया है।
हरा रंग- भारत माता की धरती हरियाली का प्रतीक है, जो जीवनदायिनी है, इसे शक्ति का प्रतीक माना गया है।
चक्र का नीला रंग- नीले आसमान की अथाह गहराई का प्रतीक माना गया है।
चक्र का महत्व- अशोक चक्र से प्रेरित होकर 24 सलाखों वाले चक्र को ध्वज के मध्य में स्थान दिया गया। इसका अर्थ यहां पर 24 सलाखें, दिन और रात के 24 घंटों के प्रतीक हैं। चक्र अर्थात पहिया जो निरंतर भारत को प्रगति के पथ पर आगे बढऩे का प्रतीक है।