25 मार्च 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

श्रद्धेय कर्पूरचंद्र कुलिशजी जन्मशती : विचार गोष्ठी का आयोजन : सीवी रमन यूनिवर्सिटी कुलपति ने मुख्य वक्ता के रूप में किया संबोधित

-अतिथियों ने डाला कुलिशजी के जीवन पर प्रकाश, उनके आदर्शों को किया याद

3 min read
Google source verification

खंडवा

image

Manish Arora

Mar 25, 2026

kulishji

खंडवा. कार्यक्रम के शुभारंभ पर दीप प्रज्जवलन करे अतिथिगण।

श्रद्धेय कुलिशजी अपनी पत्रकारिता के आदर्शों पर जीवन जीते रहे, यह एक बड़ी बात है। कुलिशजी ने जिन आदर्शों की स्थापना की वह डीएनए आज भी आदरणीय गुलाब कोठारीजी की रगों में दिखता है। मैं पत्रिका समूह को श्रद्धेय कर्पूरचंद्र कुलिशजी की जन्मशती पर बहुत बहुत बधाई देता हूं। यह बात मंगलवार को पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूरचंद्र कुलिशजी की जन्मशती पर आयोजित विचार गोष्ठी में डॉ. सीवी रमन यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अरुण रमेश जोशी ने कही।

कुलिशजी की जन्मशती को लेकर आईसेक्ट परिसर वनमाली सृजन पीठ मुक्ताकाश हॉल में हुए आयोजन में मुख्य वक्ता कुलपति डॉ. अरुण आर जोशी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार व उद्योगपति डॉ. आलोक सेठी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. सीवी रमन यूनिवर्सिटी कुल सचिव रवि चतुर्वेदी और शिक्षाविद् नीलेश माहुलीकर रहे। संचालन वरिष्ठ साहित्यकार गोविंद शर्मा ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलिशजी के छायाचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत पत्रिका परिवार द्वारा मोतियों की माला और कुलिशजी की पुस्तक से किया गया। इस अवसर पर पत्रिका सर्कुलेश हेड राहुलसिंह सेंगर, मार्केटिंग हेड अश्विन विधानी, चीफ रिपोर्टर मनीष अरोरा, राजेश पटेल, दीपक सपकाल, एचआर हेमंत चरपे और मार्केटिंग से भूपेंद्र गुप्ता उपस्थित रहे।

कुलिशजी के मानकों पर आज भी चल रहीं पत्रिका
मुख्य वक्ता डॉ. अरुण आर जोशी ने कहा मुझे लगता है कि पत्रकारिता में समाचार पत्रों में प्रतियोगतिा के चलते अखबारों ने सनसनी को चुना,।जनजागरण से दूर हो गए, उत्तेजना वाले माध्यम से ज्यादा करीब हो गए। कई ऐसे माध्यम आज आ गए है, जो एक शुद्ध पत्रकारिता से दूर करते चले जा रहे है। मैंने राजस्थान में 12 साल काम किया है। वहां मैंने पत्रिका की पत्रकारिता देखी है, जो कुलिशजी द्वारा मानक तय किए गए थे उसी पर आज भी पत्रिका चल रही है।

पत्रिका ने दिया हमेशा सच का साथ
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. आलोक सेठी ने कहा पत्रिका ने कैसे हम अपने अधिकारों के प्रति सजग रह पाए यह बताया है। श्रद्धेय कर्पूरचंद कुलिशजी ने ये ही काम किया। वें इसलिए ऐसा कर पाए क्योंकि राजस्थान की मिट्टी में एक जीवटता उसमें विषमता से जूझने की क्षमता है। पत्रिका ने हमेश सच का साथ दिया सच की बात की। इसलिए पत्रिका आज देश में बड़े सम्मान से पढ़ा जाता है। जब पत्रिका में कोई बात छप जाती है तो उसको चेक करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

पत्रिका की प्रमाणिकता कुलिशजी की पुण्याई
मुख्य अतिथि नीलेश माहुलीकर ने कहा कि जब मुझे यहां बोलने के लिए आमंत्रित किया गया तो मैंने कुलिशजी पर बहुत शोध किया। जिस तरह उन्होंने 1956 में पत्रिका की स्थापना की और अपने आदर्शों से उसे ऊंचाई पर पहुंचाया, यह एक प्रेरणा का विषय है। ऐसे समय में जब पत्रकारिता एक चैलेंजिंग काम था, उस समय उन्होंने चुनौती भरे काम को अपने जीवन का ध्येय बना लिया। इसके अलावा कोई काम नहीं करुंगा। आज पत्रिका जिस प्रमाणिकता के साथ आपके सामने है, वह कुलिशजी की ही पुण्याई है।

कुलिशजी ने पत्रकारिता के धर्म को अपनाया
मुख्य अतिथि कुल सचिव रवि चतुर्वेदी ने कहा पत्रकार उसी को बनना चाहिए जो पत्रकारिता के धर्म को निभाए। बड़े गर्व की बात है कि श्रद्धेय कुलिशजी ने उस धर्म को समझा, उसे अपनाया और आगे बढ़े। पत्रिका अपने उस धर्म पर आज भी कायम है। आज वह समय है जब सारे अखबार अपने धर्म से विचलित हो गए, उनका उद्देश्य खबर न देकर कुछ और कररना हो गया। ऐसे समय पत्रिका अपने धर्म पर बैठी हंै, अपने धर्म को निभा रही है ये बहुत बड़ी बात है।

कुलिशजी ने अपनी प्रतिभा की रोशनी बिखेरी
कार्यक्रम का संचालन कर रहे गोविंद शर्मा ने कहा कुलशजी लाभ-लोभ की भावना से परे सिर्फ जनहितार्थ समर्पित पत्रकार थे। तीस वर्ष से भी कम उम्र में अखबार निकालने का साहस करना कुलिशजी के ही बस की बात थी। कुलिश का अर्थ हीरा होता है इसे तराश कर हर कोण से इसकी अलग चमक से जग रौशन होता है। कुलिशजी ने साहित्य, संपादन और पत्रकारिता के विभिन्न आयामों में अपनी प्रतिभा की रौशनी बिखेरी।