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आरटीई की ये सच्चाई जानकर हैरान रह जाएंगे आप, क्योंकि इसलिए नहीं मिल रहा शिक्षा का अधिकार

प्रक्रिया की खामी और बच्चों का भविष्य...इसका सबसे बड़ा मामला...

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खंडवा

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Amit Jaiswal

May 29, 2019

1.19 lakh applications received under RTE Act

rte admission mp latest news 2019-20

खंडवा. शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) की प्रक्रिया में कई खामियां हैं। इसका सबसे बड़ा मामला तो ये सामने आया है कि 15 फीसदी अभिभावक लॉटरी में बच्चों का नाम किसी बड़े निजी स्कूल में न देख पेमेंट सीट पसंद का स्कूल चुनते हैं।
आरटीई के तहत गैर अनुदान एवं मान्यता प्राप्त अशासकीय स्कूलों की प्रथम प्रवेशित कक्षा में नि:शुल्क प्रवेश दिया जाता है लेकिन खामियां ही बड़ी वजह है कि अभिभावकों को स:शुल्क स्कूल चुनना पड़ता है। पड़ोस की सीमा का बंधन सहित प्रक्रिया में लेतलाली भी इसकी बड़ी वजह है।

प्राइम इंफो
- 30 अप्रैल से शुरू हुई है प्रक्रिया, 29 मई तक कर सकेंगे आवेदन।
- 16 जून 2019 की स्थिति में की जाएगी बच्चों की उम्र की गणना।
- 3-5 वर्ष नर्सरी, केजी-1 व केजी-2 तथा 5 से 7 वर्ष कक्षा-1 के लिए उम्र निर्धारित।

कमजोर व वंचित वर्ग के लिए ये जरूरी
वर्तमान मान्य बीपीएल कार्डधारी, अन्त्योदय कार्डधारी, एससी-एसटी, विमुक्त जाति, वनभूमि पट्टाधारी, नि:शक्त बच्चे, परिवार, एचआइवी ग्रस्त व अनाथ बच्चे।

छोटे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई से बचना चाहते हैं अभिभावक
आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया में अभिभावक इस बार रूचि नहीं ले रहे हैं। 5 हजार से ज्यादा सीटें निजी स्कूलों में रिजर्व की गईं हैं लेकिन अब तक आवेदन दो हजार से भी कम हुए हैं। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया बहुत ही सुस्त है। ऐसे में जब जिला शिक्षा केंद्र से जुड़ा अमला अभिभावकों से व्यक्तिगत राय ले रहा है तो जवाब मिल रहा है कि अगर बड़े निजी स्कूल में प्रवेश मिले तो बच्चों को वहां पढ़ाने का मतलब है, अन्यथा छोटे प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने से तो बेहतर है कि फीस देकर बड़े निजी स्कूल में पढ़ाएं। बता दें कि नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत कमजोर वर्ग एवं वंचित समूह के बच्चों के नि:शुल्क प्रवेश की प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाने के दावों के बीच 30 जून तक ही बच्चे प्रवेश पा पाएंगे। ऐसे में इन बच्चों का नुकसान ही होगा, क्योंकि निजी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2019-20 की पढ़ाई पहले ही शुरू हो गई है। कमजोर वर्ग एवं वंचित समूह के बच्चे पढ़ाई में पिछड़ेंगे। प्रवेश प्रक्रिया की गतिविधियों की समय-सारिणी राज्य शिक्षा केंद्र संचालक आइरीन सिंधिया जेपी द्वारा जारी किया गया है।

ऐसे चल रही है आरटीई प्रवेश प्रक्रिया...
30अप्रैल से: अभिभावकों द्वारा ऑनलाइन आवेदन
30अप्रैल से 29मई तक: पोर्टल से ऑनलाइन आवेदन की पावती एवं सत्यापन प्रपत्र डाउनलोड करना।
30अप्रैल से 30मई तक: आवेदकों द्वारा निकटस्थ जनशिक्षा में उपस्थित होकर सत्यापन कराना।
30अप्रैल से 29मई तक: त्रुटि सुधार विकल्प की उपलब्धता (सत्यापन के बाद त्रुटि सुधार नहीं होंगे)।
1मई से 5जून तक: सत्यापनकर्ता अधिकारियों से सत्यापन प्रपत्र प्राप्त कर बीआरसी द्वारा पोर्टल पर प्रविष्टि।
12जून: पोर्टल पर पात्र दर्ज हुए बच्चों में से रेंडम पद्धति से ऑनलाइन लॉटरी द्वारा सीटों का आवंटन एवं चयनित आवेदकों को एसएमएस द्वारा सूचना।
12 से 20 जून तक: आवेदकों द्वारा पोर्टल से आवंटन पत्र डाउनलोड करना।
13 से 25 जून तक: अशासकीय स्कूल के आवंटन के बाद प्रवेश।
13 से 30जून: पात्र पाए गए बच्चों का स्कूलों में प्रवेश एवं प्राइवेट स्कूल द्वारा प्रवेशित बच्चों की पोर्टल पर रिपोर्टिंग दर्ज करना तथा प्रवेशित बच्चे का आधार सत्यापन।

उम्र के संबंध में ये रहेगी पात्रता
- नर्सरी, केजी-1, केजी-2 के लिए न्यूनतम आयु 3 से 5 वर्ष
- कक्षा 1 में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 5 से 7 वर्ष
चुनाव के चलते प्रक्रिया हुई प्रभावित
लोकसभा चुनाव-2019 के चलते आरटीई की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। 339 स्कूलों में 5300 सीटों के मुकाबले अब तक 1800 आवेदन ही हो पाए हैं।

- लॉटरी में 15 फीसदी अभिभावक हर वर्ष निजी स्कूल उनकी पसंद का नहीं आने पर वह स्कूल बदलकर पेमेंट शीट पर पसंद के स्कूल में पढ़ा लेते हैं। हम भी नियमों के तहत ही प्रवेश दे सकते हैं। पड़ोस की सीमा का भी बंधन है।
मकसूद खान, आरटीई प्रभारी, जिला शिक्षा केंद्र