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आत्मनिर्भर भारत… गोशाला अब गायों के साथ मछली पालन का भी करेगी काम, बांध के बैक वाटर में आधुनिक तकनीक से बनेगी परियोजना

-आवलियां डेम के बैकवाटर में 14 टैंक बायो फ्लॉक सिस्टम, 12 केच संरचनाएं बनेंगी -जिपं कर रहा निर्माण, 60 टन मछली उत्पादन का रखा है लक्ष्य, 10 दिन में शुभारंभ

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खंडवा

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Manish Arora

Mar 26, 2026

fish farming

खंडवा. परियोजना के तहत तैयार किए जा रहे केच का निरीक्षण करते जिपं सीईओ। फाइल फोटो

जिले के खालवा ब्लॉक की रोशनी ग्राम पंचायत आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाने जा रही है। पंचायत क्षेत्र स्थित राधा-कृष्ण गोशाला द्वारा अब आधुनिक तकनीक आधारित समन्वित मत्स्य पालन परियोजना विकसित की जाएगी। जिला पंचायत द्वारा यह परियोजना करीब दो हेक्टेयर भूमि पर स्थापित होगी, जिससे ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और पंचायत की आय में भी वृद्धि होगी।

अत्याधुनिक सिस्टम हो रहा तैयार
परियोजना के तहत आंवलिया बांध परियोजना के बैक वाटर में अत्याधुनिक री-सर्कुलेशन एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) की दो यूनिट स्थापित की जाएंगी, जिससे कम पानी में अधिक उत्पादन संभव होगा। इसके साथ ही 14 टैंक बायोफ्लॉक सिस्टम और तीन पोंड आधारित बायोफ्लॉक सिस्टम भी विकसित किए जाएंगे। मध्य जलाशय में 12 केज (पिंजरा) संरचनाएं बनाई जाएंगी, जिनमें विभिन्न प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जाएगा।

उद्यानिकी, पशुपालन से भी जोड़ेंगे
इस समन्वित मॉडल की खास बात यह है कि इसमें मत्स्य पालन के साथ-साथ कृषि, उद्यानिकी (हॉर्टिकल्चर) और पशुपालन को भी जोड़ा जाएगा। गोशाला से निकलने वाले अपशिष्ट का उपयोग री-सर्कुलेशन तकनीक के माध्यम से अन्य उत्पादन कार्यों में किया जाएगा, जिससे लागत कम होगी और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। इसके अलावा फिंगरलिंग (मछली बीज) उत्पादन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर ही मत्स्य बीज उपलब्ध हो सके।

60 टन मछली उत्पादन का लक्ष्य
जिला पंचायत के अनुसार इस परियोजना के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 60 टन मछली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे पंचायत को आर्थिक मजबूती मिलने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। आगामी दस दिन में जिला पंचायत द्वारा इसका कार्य पूर्ण कराकर टेंडर जारी किए जाएंगे।

ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार
राधा कृष्ण गोशाला के माध्यम से मछली पालन केंद्र तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना से ग्रामीणों को रोजगार भी मिलेगा। जल्द ही इसका कार्य पूर्ण कर परियोजना को आरंभ किया जाएगा।
डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा, जिपं सीईओ