खंडवा. एक खास तरह की गोंद को बुरहानपुर से इंदौर लेकर जा रहे दो व्यक्तियों को वन विभाग की टीम ने पकड़ा है। इनके कब्जे की चौपहिया गाड़ी से करीब सात क्विंटल गोंद जब्त की गई है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह इंदौर के एक ट्रेडर्स को गोंद बेचने जा रहे थे। अब वन विभाग के अधिकारी इस मामले से जुड़े तथ्यों को जुटाते हुए कार्रवाई कर रहे हैं। यह कार्रवाई वन परिक्षेत्र धिकारी खंडवा जेपी मिश्रा के नेतृत्व में सहायक संतोष दिहाड़े, वन रक्षक संतोष सिंह चौहान, उत्तम सिंह, जलील शेख, अनिल बाथम ने की है।
डुल्हार फाटा में रोकी गाड़ी
रेंजर मिश्रा ने बताया कि बोरगांव में पदस्थ अमले के पास सूचना आई थी कि एक चौपहिया वाहन में बड़ी मात्रा में गोंद लेकर कुछ लोग इंदौर जा रहे हैं। सूचना पाकर डुल्हार फाटा के पास वन अमले ने नजर रखी तो एमपी 09 एफए 0277 नंबर का वाहन पकड़ में आया। इस वाहन में 11 बोरी गोंद मिली जो करीब सात क्विंटल बताई जा रही है।
करौली के जंगल से आई गोंद
पकड़े गए आरोपी गोरेलाल पिता अनार सिंह (45) निवासी करौली बुरहानपुर और वाहन चालक ज्ञान सिंह पिता भुवन सिंह निवासी सारनी बुरहानपुर से पूछताछ की गई है। गोरेलाल का कहना है कि उसने अपने परिवार के साथ कई महीनों की मेहनत के बाद सलई गोंद को इकट्ठा किया है। जिसे लेकर इंदौर के धीरज ट्रेडर्स को बेचने जा रहे थे।
उद्योग में आती है काम
सलई गोंद का उपयोग खाने में नहीं किया जाता है। यह गोंद सामान्य तौर पर सभी जंगलों में नहीं होती है। खंडवा के गुड़ी रेंज और बुरहानपुर के करौली इलाके में सलई गोंद बहुतायत पाई जाती है। इस गोंद का उपयोग उद्योगों में बार्निश, पेंट और दवाई के कैपशूल कवर बनाने में किया जाता है।
वन विभाग का है प्रतिबंध
सलई गोंद की विक्री और परिवहन शासकीय अनुमति लेकर ही किया जा सकता है। जितना गोंद जब्त किया गया इतना गोंद एक बार में परिवहन करने की अनुमति मिलने में दिक्कतें आती हैं। इसका बाजार मूल्य सवा दो सौ रुपए किलो है। पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि इसके पहले कई बार मोटर साइकिल से भी वह गोंद बेचने निकल चुके हैं।