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rare snake: दुर्लभ प्रजाति का सर्प देखने उमड़ी भीड़

जिले के किल्लौद ब्लॉक में मिला अनाकोंडा जैसी आंखों वाला सांप

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 rare species of snake in khandwa

rare species of snake in khandwa

खंडवा. शासकीय प्राथमिक शाला झींगाधड़ भवन के आसपास दुर्लभ प्रजाति वाला वन्य जीव दो मुंह वाला सांप मिला। यह सांप की दुर्लभ प्रजाति है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में रेड सैंड बोआ स्नेक के नाम से जाना जाता है। जो भारत के राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट,्र आंध्र प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में पाया जाता है। सांप को शाला प्रधान पाठक दिलीप सिंह तोमर, कमलेश कुमार चौहान, युवराज सिसोदिया सहायक अध्यापक द्वारा समीपस्थ स्थिति किल्लौद रेंज ऑफिस जाकर हनुमान सिंह ठाकुर डिप्टी रेंजर, वनरक्षक जाफर शेख, वनरक्षक सत्येंद्र बहादुर के सुपुर्द किया। डिप्टी रेंजर उक्त कार्य के लिए शाला परिवार की सराहना की।

रेत के नीचे होता है आशियाना
रेतीली मिट्टी के नीचे रहने के कारण इसका नाम सैंड बोआ पड़ा। इस सांप की आंखें अनाकोंडा की तरह उसके सिर पर होती है। यह सांप रेत में छिपते वक्त अपना सिर बाहर रखता है। यह खुद बिल नहीं बनाता और चूहों के बिल में घुसकर शिकार करता है और बिल को ही अपना आशियाना बना लेता है। इस प्रजाति के सांपों का उपयोग दवाओं और सौन्दर्य प्रसाधन की वस्तुओं में होता है, जिसके कारण अंतरराष्टीय बाजार में इसकी मांग है। इसका उपयोग जादू-टोने में भी किया जाता है। इस सांप का पूछ वाला हिस्सा भी मुंह जैसा दिखता है, इसीलिए इसे दोमुंहा सांप कहा जाता है। यह सांप खतरा महसूस होने पर अपनी पूछ को मुंह की तरह ऊपर उठाकर लहराता है और अपना बचाव कर लेता है। यह विषहीन होता है, और दूसरे सांपों का भी शिकार करता है।

इस सांप को लेकर कई अंधविश्वास
इस सांप को लेकर कई तरह के अंधविश्वास भी हैं, जिसके कारण यह विलुप्तप्राय प्रजाति में शामिल हो चुका है। मान्यता है कि यदि इस सांप को विशेष क्रियाओं द्वारा का सेवन किया जाए, तो मनुष्य मनुष्य अलौकिक शक्तियों का स्वामी बन जाता है। कुछ जगहों पर ऐसी मान्यता है कि इस सांप का मांस खाने से मनुष्य सेक्स पावर में इजाफा होता है। वहीं कई जगह यह मान्यता है कि बड़ी से बड़ी बीमारी इस सांप का मांस खाने से ठीक हो जाती है।