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ग्राउंड रिपोर्ट: गोबर से पटे मैदान में उड़ती धूल के बीच निखर रहीं खेल प्रतिभाएं

सुविधाओं को मोहताज गुरु गोविंद सिंह स्टेडियम, मवेशियों के बीच खेल को तलाशते हैं जगह, खिलाडि़यों को पानी तक नसीब नहीं

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Sports talents flourishing in the field covered with cow dung

Sports talents flourishing in the field covered with cow dung

खंडवा. शहर का सिविल लाइन एरिया, यहीं जिले के आला अफसर रहते हैं। इसी क्षेत्र में शहर का सबसे बड़ा गुरु गोविंद सिंह स्टेडियम बना है। जहां हर रोज टहलने और कसरत करने के लिए अफसर, नेता और व्यापारी आते हैं। लेकिन इस स्टेडियम की हालत बेहद दयनीय है। हकीकत यह है कि गोबर से पटे मैदान में उड़ती धूल के बीच खेल प्रतिभाएं निखरने को मजबूर हैं। कहने को यह शहर स्वच्छता सर्वेक्षण की सीढ़ी चढ़ रहा है, लेकिन मौजूदा हालात पर गौर करें तो हालात बदतर हैं।
बोर है पर बिजली नहीं
गुरु गोविंद सिंह स्टेडियम में दिखावे के लिए बोर पंप लगा है। यहां बिजली का तार भी जुड़ा है लेकिन उसमें करंट नहीं दौड़ता। मैदान सींचना तो दूर जरूरत पर खिलाडि़यों को पीने का पानी तक नसीब नहीं हैं। स्टेडियम में खिलाडि़यों के लिए जो चेंजिंग रूम बने हैं, उनमें अनाधिकृत लोगों का कब्जा है।
पहले फेंकते थे बोतलें
इस खेल मैदान में शराबियों का जमावड़ा अंधेरा होते ही हो जाता है। हालांकि उस पर अंकुश नहीं लगा है। लेकिन सीसीटीवी कैमरे लग जाने से इतना जरूर हुआ कि अब खेलने से पहले खिलाडि़यों को बोतल और कांच के टुकड़े बीनने नहीं पड़ते। यहां गौर करें तो सीसीटीवी से ज्यादा जरूरी बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं हैं।
मवेशियों के साथ गाडि़यां
खेल मैदान में मवेशी घूमते हैं। यहीं गंदगी करते हैं। रही कसर वाहन चलाने वाले पूरी कर देते हैं। मैदान में वाहनों के चलने से यहां धूल उड़ती है। कई दफा खिलाडि़यों ने नगर पालिक निगम और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को शिकायत की है, लेकिन सुनवाई किस स्तर पर हो सकी, यह सबके सामने है।
वर्जन...
लॉक डाउन के बाद सरकारी कैम्प नहीं लगा। विभाग भी खेल सामग्री उपलब्ध नहीं कराता। पीने का पानी तक यहां नहीं है, खिलाड़ी घर से बोतल लेकर आते हैं। स्टेडियम के चेंजिंग रूम पर कब्जे हैं।
- कृष्णा सिंह, फुटबॉल कोच
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खेल मैदान में लोग वाहन चलाना सीखते हैं। मवेशी दिन भर घूमते और गंदगी करते हैं। पानी छिड़काव की व्यवस्था तक नहीं है। धूल उड़ती है तो मैदान सींचने को बोतलों में पानी भरकर लाते हैं।
- दीपक मिश्रा, क्रिकेट कोच
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हम 22 साल से यहां घूमने आ रहे हैं। मंत्री, विधायक सब इस मैदान की व्यवस्था देख चुके हैं। उड़की धूल और गोबर के बीच खिलाड़ी सीखने को मजबूर रहता है। सुविधा के नाम पर यहां कुछ नहीं है।
- योगेन्द्र तिवारी, शहरवासी