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बस के नीचे आया किक्रेट टीम का कप्तान, मौत

ओवरब्रिज पर हुआ हादसा, कार को ओवरटेक कर रही थी बस, किक्रेट खेलकर लौट रहा था नौवीं का छात्र

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The captain of the cricket team came under the bus, died

The captain of the cricket team came under the bus, died

खंडवा. क्रिकेट खेलने के बाद अपनी टीम के साथ साइकिल से घर लौट रहा नौवीं का छात्र बस के नीचे आ गया। मंगलवार की सुबह करीब पौने 10 बजे ओवर ब्रिज पर साथी की साइकिल का झटका लगते ही क्रिकेट टीम का कप्तान गिरा और बस के पिछले पहिया के नीचे आ गया। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद लोगों में भारी गुस्सा है।
पता चला है कि पदमकुंड वार्ड के छोटा अवार निवासी त्रिलोक प्रसाद गंगराड़े का बेटा सार्थक गंगराड़े (14) सोफिया कान्वेंट स्कूल में नौवीं का छात्र था। वह एक अच्छा क्रिकेटर होने के साथ अपनी टीम का कप्तान भी रहा। हर रोज वह जिमखाना में क्रिकेट की प्रेक्टिस के लिए जाता था। खुद पिता उसे छोड़ने जाते थे। लेकिन आज वह खुद साइकिल से गया था। जब वह खेलने के बाद अपनी साइकिल से साथियों के साथ लौटने लगा तो ओवर ब्रिज पर अनियंत्रित होकर गिरा और खंडवा से भोपाल जा रही बस एमपी 05 पी 0187 की चपेट में आ गया।
दो बहनों में अकेला भाई
चाय पत्ती का काम करने वाले त्रिलोक प्रसाद गंगराड़े की तीन संतानों में सबसे बड़ी बेटी स्नेहा है। इसके बाद सार्थक था और छोटी बेटी आठ साल की सौम्या है। बेटे को अच्छा क्रिकेटर बनाने के लिए पूरा परिवार मेहनत कर रहा था। इस हादसे ने परिवार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जब सार्थक की मां भावना को खबर लगी तो वह बेसुध होकर गिर पड़ी। बदहवास पिता का हाल देख स्नेहा ने ही हिम्मत दिखाई और छोटी बहन के साथ मां-पिता को सहारा दिया।
कलेक्टर के सामने उठी खंडवा की आवाज
छात्र की मौत से आक्रोशित खंडवा की आवाज़ के सदस्यों ने कलेक्टर अनूप कुमार सिंह से मुलाकात की है। उन्हें रिंग रोड एवं बायपास बनाने के लिए ज्ञापन सौंपा गया। मांग रखी है कि जल्द से जल्द खंडवा में रिंग रोड और बायपास का निर्माण किया जाए। वैकल्पिक मार्ग नहीं होने से शहर में सड़क दुघर्टनाओं में लोगों की जान जा रही है। कलेक्टर से मिलकर मांग रखने वालों में हेमंत मुंदरा, अरुण कुमार बाहेती, कमल नागपाल, लव जोशी, समीर खान, मुल्लु राठौर और अंशुल सैनी उपस्थित रहे।
नेत्रदान: मेरे भाई की आंखें दुनिया देखेंगी
घर की दहलीज पर इकलौते बेटे का शव रखा था। बदहवास मां और पिता कुछ कहने की हालत में नहीं थे। मातम पसरे घर में बेटे की मौत का दुख बांटने अरुण गंगराड़े और अशोक गंगराड़े भी पहुंचे। उन्होंने नेत्रदान के लिए प्रेरित किया तो सार्थक की बड़ी बहन ने समझदारी दिखाई। मां और पिता को ढाढ़स बंधा रही स्नेहा ने नेत्रदान के लिए हामी भर दी और कहा कि उसके भाई की आंखे भी दुनिया देख सकेंगी। परिवारजनों की सहमति से गंगराड़े समाज के राकेश, सदाशिव, अशोक अमरीश, दिलीप दशोरे, बालकृष्ण पाटिल की उपस्थिति में नेत्रदान देहदान एवं अंगदान जनजागृति समिति ने लायंस क्लब खंडवा, सक्षम संस्था व एमके इंटरनेशनल आई बैंक इंदौर के सहयोग से नेत्रदान प्रक्रिया पूरी कराई गई। सार्थक की आंखों से 6 व्यक्तियों के जीवन में अब उजाला हो सकेगा। इस दौरान समिति के नारायण बाहेती, डॉ. सोमिल जैन, नेत्र सहायक प्रहलाद तिरोले, राजीव मालवीय, अनिल बाहेती, गांधी प्रसाद गदलें, राजीव शर्मा, जीएन सोनी, डॉ. राधेश्याम पटेल, सुरेंद्र सोलंकी, चंचल गुप्ता ने शोक संवेदना व्यक्त की।
ब्रिज पर रास्ता ही नहीं छोड़ा
ओवर ब्रिज पर हादसे के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज निकाला है। जिसमें साफ दिख रहा है कि किक्रेट खेलकर साइकिल से लौट रहे छात्रों को निकलने के लिए पर्याप्त जगह ही नहीं मिल रही थी। बस स्टैंड की ओर से भोपाल की ओर जा रही बस के आगे एक और बस लगी थी। आगे वाली बस के पीछे एक कार थी जिसे भोपाल की बस के चालक ने ओवर टेक किया तो ब्रिज के दूसरी तरफ निकलने के लिए रास्ता कम पड़ गया। खुद को बचाते हुए साइकिल सवार क्रिकेट खिलाड़ी निकल ही रहे थे तभी अचानक झटका लगा और सार्थक नीचे गिरते ही बस के पिछले पहिया की चपेट में आ गया। यह बात सामने आई है कि बस स्टैंड से रेलवे स्टेशन की ओर सवारी लेने गए बस चालक ने जल्दबाजी में ओवरटेक किया जिसकी वजह से एक मासूम की जान चली गई।
योजना, ज्ञापन और मातम
इस छोटे से शहर में विकास पंख फैलाने को तैयार है। लेकिन अफसर, नेता योजना और ज्ञापन तक सीमित हैं। रही मातम की बात तो वह आम जनता के हिस्से ही आता है। सत्ता का सुख भोग रहे जनप्रतिनिधि कोरे कागजों पर योजनाएं बनाकर अपना फायदा देखते हैं और अफसर उनके फायदे पर मुहर लगने का इंतजार करते हैं। व्यवस्था सुधारने की बात हो तो सब एक दूसरे का मुंह ताकते नजर आते हैं। नगरीय निकाय अपनी जिम्मेदारी से भागता है और सड़क विभाग को यहां देखने की फुरसत नहीं। परिवहन अफसर और यातायात के लिए जिम्मेदार वर्दी वाले कागजी आदान प्रदान में जुटे रहते हैं। हाल ही में बड़ी मुश्किल से सड़क सुरक्षा समिति की एक बैठक हुई जिसके आदेश और निर्देश अब भी धूल फांक रहे हैं। शहर की फिजा शांत स्वभाव की है, एक घर का चिराग बुझने के बाद भी उग्र होने वालों के रोंगटे खड़े नहीं हुए। कुछ हुआ तो यह कि एक और ज्ञापन फिर योजना और फिर मातम।