
मोर का शिकार कर खाने वाले आरोपियों को तीन-तीन वर्ष का सश्रम कारावास-जेएमएफसी न्यायालय ने 10-10 हजार का अर्थदंड भी किया
खंडवा.
न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी तहसील पुनासा न्यायालय द्वारा मोर का शिकार कर जंगल में बनाकर खाने वाले तीन आरोपियों को तीन-तीन वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने आरोपी जाहिद पिता मुश्ताक निवासी मदनी, कोमल पिता शोभाराम निवासी मदनी व गोपाल पिता मदनसिंह, निवासी पुरनी को वन जीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9/51 में 10-10 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया। अभियोजन की ओर से प्रकरण का संचालन सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी धीरेन्द्रसिंह चौहान ने किया।
अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी मो. जाहिद खान सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी ने बताया कि दिनांक 18 जनवरी 2013 की है। मुखबिर द्वारा जंगल में शिकार होने की सूचना पर वन परिक्षेत्र मूंदी के बीट धारीकोटला वन कक्ष क्रमांक 111 में वन क्षेत्राधिकारी मूंदी एवं वन अमला एवं नर्मदानगर थाने के पुलिस स्टॉफ द्वारा काकडराय क्षेत्र में 6 व्यक्ति आग जलाकर खाना बनाते हुए दिखे। अमले के घेराबंदी कर पास पहुंचने पर मौके पर 3 आरोपी पकड़े गए तथा 3 आरोपी फरार होने में सफल हो गए। मौके पर भगौने में पका हुआ मांस रखा मिला। घटना स्थल पर राष्ट्रीय पक्षी मोर के अधजले पंख, सिर, गले की थैली, मोर के दो पैर जो घुटने के पास से कटे हुये ताजे पाए गए। इसके साथ ही घटना स्थल पर शिकार के किलए उपयोग में ली गई सामग्री एवं अन्य सामग्री भी पायी गयी थी।
उक्त सभी सामग्री को जप्त कर एवं मोर के अवशेष एवं शिकार की सामग्री विधिवत जप्त की गई। मौके पर पकड़े गये आरोपियों ने पूछताछ करने पर उन्होंने अपना नाम जाहिद पिता मुश्ताक, कोमल पिता शोभाराम, गोपाल पिता मदन बताया अन्य तीन आरोपी फरार होने में सफल हो गये थे। उनके नाम चंदर पिता रणछोड़, इदरीश पिता जमील, फिरोज पिता याकूब होना बताया था। मौके पर जप्त मांस व शव परीक्षण तथा पशु चिकित्सक की सलाह पर एकत्रित मांस जांच के लिए सीनियर साइंटिस्ट भारतीय वन प्रणाली संस्थान देहरादून भिजवाया गया। जहां पर जप्तशुदा मांस मोर का ही है, इसकी पुष्टि फॉरेसिेक जांच रिपोर्ट में की गई थी।
Published on:
23 Dec 2021 10:23 pm
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