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अब नहीं होगी किसानों को यूरिया की किल्लत……… जानिए कैसे

यूरिया का विकल्प नैनो तरल यूरिया, फसलों के लिए फायदेमंद, लाख हेक्टेयर में होती है बुवाई, 50 हजार टन यूरिया की सालाना खपत

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खंडवा. यूरिया की कमी के बीच किसानों के सामने एक नया विकल्प आ गया है। इफको ने नवाचार करते हुए नैनो तरल यूरिया उपलब्ध कराया है। यह फसलों के लिए फायदेमंद बताया जा रहा है। खासतौर से सेवज की फसलों के लिए रामबाण होगा। नए विकल्प से अब किसान को 40-50 किलो यूरिया की बोरी उठाने की भी जरूरत नहीं होगी। ग्राम सहकारी समितियों से किसान नैनो तरल यूरिया ले सकेंगे। जिले में सालाना करीब 50 हजार टन यूरिया खाद की खपत है। इस साल अब तक 14 हजार टन यूरिया ही मिल पाया। ऐसे में नैनो किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है।
प्रदेश में यूरिया खाद का संकट रहा। किसानों को कई मुश्किलें झेलनी के बाद भी यूरिया खाद नहीं मिल पाया था। खाद की दुकानों से किसानों अक्सर खाली हाथ लौटना पड़ रहा था। किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ी। बारिश भी कम हुई और यूरिया खाद का भी अभाव रहा। ऐसे में किसान मायूस रहा। इफको द्वारा विकल्प तैयार करने से किसानों की उम्मीदें फिर जगी है। किसान यूरिया खाद की जगह नैनो तरल यूरिया का भरपुर उपयोग कर सकेंगे। यह फसलों के लिए भी किफायती बताया जा रहा है।

ऐसे करें उपयोग
तरल के उपयोग से पहले बोतल को अच्छी तरह हिलाएं। इस तरल का उपयोग दो बार किया जा सकता है। पहला छिडक़ाव फसल के अंकुरण के 30 दिन बाद और दूसरा छिडक़ाव पहली स्पे्र के 20 से 25 दिन बाद। यह यूरिया लिक्विड तरल को ठंडी और सूखे जगह पर रखना होगा। इफको अधिकारियों का कहना है कि 500 एमएल नैनो यूरिया लिक्विड 100 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें।

कीमत कम, राहत ज्यादा
500 एमएल की बोतल उपयोग के लिए एक यूरिया 45 किलो कट्टे के बराबर होती है। 125 लीटर पानी में इसे डालने पर छिडक़ाव के लिए आठ टंकी जितना रसायन तैयार होता है। ठोस दानेदार यूरिया के एक कट्टे की कीमत 266 रुपए है, जबकि नैनो यूरिया तरल बोतल 240 रुपए में मिल जाती है। पाली में 18 हजार और सिरोही में 8 हजार बोतल नैनो तरल यूरिया की आपूर्ति ग्राम सेवा सहकारी समितियों में हुई है।

क्यों उपयोगी है नैनो यूरिया
नैनो यूरिया नाइट्रोजन का स्रोत है, जो पौधों में कार्बोहाइडे्रड, प्रोटीन के निर्माण एवं पौधे की संरचना व वानस्पतिक वृद्धि के लिए उपयोगी है। सामान्यतया, एक स्वस्थ पौधे में नाइट्रोजन की मात्रा 1.5 से 4 फीसदी तक होती है। छिटकवां विधि में यूरिया पौधों की जड़ पर पड़ती है। जबकि इसमें सीधे पत्तियों पर स्प्रे होगा। फसल विकास की प्रमुख अवस्थाओं में नैनो यूरिया का पत्तियों पर छिडक़ाव करने से नाइट्रोजन की आवश्यकता प्रभावी तरीके से पूरी होती है। यह अपने नैनो कणों (यूरिया के एक दाने का पनपन हजारवां भाग) के कारण अधिक प्रभावशाली एवं उपयोगी है। इसकी अवशोषण क्षमता 80 प्रतिशत से भी अधिक पाई गई है, जो कि सामान्य यूरिया की तुलना में अधिक है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के 20 से अधिक रिसर्च सेंटरों में 94 फसलों पर ट्रायल किए गए। इससे फसलों की उपज में औसतन 8 प्रतिशत वृद्धि देखी गई है।
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