खंडवा. दीपावली त्योहार पर ट्रेन में खड़े होने को तक ठौर नहीं है। मुंबई, अहमदाबाद , चेन्नई और हैदराबाद की ओर से आने वाली कई यात्री ट्रेन में आरक्षण के लिए नो रूम हो गया है। तत्काल टिकट का इंतजार करने वाले भी हताश हो रहे हैं। इस भीड़ में सामान्य श्रेणी का टिकट लेकर यात्रा करने वालों की फजीहत हो रही है।
विंडो टिकट ही सहारा
लॉक डाउन के बाद से ई-टिकट की विक्री तेजी से बढ़ी है। लेकिन त्योहारी सीजन में जब ट्रेन में कन्फर्म टिकट नहीं मिल रहा तो विंडो टिकट ही सहारा है। ई-टिकट कन्फम्र नहीं होने पर कैंसल हो जाता है। जबकि यात्रा के लिए विंडो टिकट मान्य है।
स्लीपर में जनरल की सवारी
लंबी दूरी की ट्रेनों में आरक्षण नहीं मिलने पर वेटिंग टिकट वालों की स्लीपर और एसी कोच में भीड़ बढ़ गई है। एसी कोच तो कुछ हद ठीक हैं, लेकिन स्लीपर कोच के हाल खराब हैं। एक सीट पर दो से तीन यात्री बैठकर जा रहे हैं और इनके अलावा जनरल कोच के यात्री भी जगह पाने के लिए स्लीपर कोच में सवार हो रहे हैं।
रेल कर्मियों की ड्यूटी बढ़ी
त्योहार के इस सीजन में रेल कर्मियों की ड्यूटी में इजाफा हुआ है। रेल सुरक्षा, संरक्षा और टिकट चेकिंग स्टॉफ की जिम्मेदारी बढ़ गई है। यात्री सुविधा का ध्यान देने वाले अफसर भी मैदान में हैं। रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा के लिहाज से जांच बढ़ा गई गई है और आने जाने वाले यात्रियों के टिकट जांचने भी दल तैनाम हैं।
जुर्माना तो देना पड़ेगा
जनरल कोच की सवारी स्लीपर कोच में आकर भीड़ बढ़ा रही है। इनमें कई ऐसे यात्री भी हैं, जिन्हें चाहकर भी स्लीपर कोच का टिकट नहीं मिला। ऐसे यात्रियों पर टिकट चेकिंग स्टॉफ की पैनी नजर है। स्लीपर और एसी कोच में अनाधिकृत टिकट पर यात्रा करने वालों से सरचार्ज के साथ पैनाल्टी वसूली जा रही है। जो यात्री विवाद की िस्थति बना रहे हैं उन्हें रेल पुलिस के हवाले किया जा रहा है।