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World Sparrow Day- विलुप्त हो रही गौरैया के लिए बनाया आशियाना, बढऩे लगा कुनबा

गौरैया को बचाने के लिए 8 साल में घर की छत पर तैयार किया गार्डन

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World Sparrow Day- विलुप्त हो रही गौरैया के लिए बनाया आशियाना, बढऩे लगा कुनबा

World Sparrow Day- विलुप्त हो रही गौरैया के लिए बनाया आशियाना, बढऩे लगा कुनबा

संकेत श्रीवास्तव
खंडवा. शहर के दादाजी वार्ड निवासी काले परिवार ने विलुप्त हो रही गौरैया चिडिय़ा को बचाने की अनूठी पहल की है। अपने घर की छत पर गौरेय्या के लिए उपयुक्त माहौल तैयार किया है। उनके खाने के लिए बाजरा और पानी के सकोरे रखे हैं। आठ साल के जतन के बाद न सिर्फ गौरैया चिडिय़ा उनके घर पर आने लगी, बल्कि वहां रहकर अपना कुनबा भी बढ़ा लिया है। उनके घर की छत पर अभी करीब 30 से अधिक गौरैया चिडिय़ों का आना जाना है वहीं कई चिडिय़ों ने अपना आशिनाया बनाया है। वे रोजाना सुबह निकलती हैं और शाम ढलने के पहले लौट आती हैं। सुबह उठने के लिए काले परिवार को किसी अलार्म की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि वे गौरैया की चहचहाट से ही उठते हैं।
घरवालों को अपना लिया है गौरैया ने...
जिस तरह से मुकेश काले द्वारा गौरैया चिडिय़ा के लिए सारे इंतजाम किए गए हैं और उनकी देखरेख की जाती है। वैसे ही उनकी पत्नी पूर्णिमा काले व पुत्र आदित्य अथर्व सहित पूरा काले परिवार ध्यान रखता है। खास बात यह है कि परिवार के लोगों के सामने वे आने जाने से परहेज नहीं करते हैं।
हमारे परिवार के लिए काफी शुभ है गौरैया...
मुकेश काले बताते है कि घर पर जब से गौरैया चिडिय़ा ने अपना डेरा जमाया है। तब से उन्हें हमेशा अच्छी खबरें ही मिल रही है। वह कहती है कि गौरैया चिडिय़ा उनके लिए काफी शुभ है। सुबह-शाम वह गौरैया चिडिय़ा के आने जाने से काफी खुश रहती हैं।
चिडिय़ा के लिए लगाये पौधे..
घर के मुखिया मुकेश काले बताते हैं कि उनके यहां छत पर काफी पौधे उन्होंने गौरैया के लिए लगाएं हैं, क्योंकि गौरैया चिडिय़ा छोटी-छोटी उड़ान भरती है। उसके लिए यह पौधे काफी सहायक होते हैं। पास- पास पौधे होने की वजह से गौरैया चिडिय़ा को यहां से वहां जाने में काफी सहूलियत होती है। उन्होंने बताया कि गौरैया चिडिय़ा की वजह से ही आज उनके यहां छत में हरा-भरा गार्डन है।
गौरैया चिडिय़ों के लिए बनाया विशेष स्टैंड
समाज के हेमन्त मोराने ने बताया की पक्षियों के लिये मुकेश काले द्वारा उन्होंने अपने घर की छत पर एक लोहे के स्टैंड पर पक्षी घर बनवाया और उसमें दाना पानी रखने हेतु सुविधा की छत में भी पानी की व्यवस्था की, छायादार जगह बनाकर वहां पानी के बर्तन भर कर रखें। पक्षियों के लिए चना, चावल, ज्वार, गेंहूं आदि जो भी घर में उपलब्ध हो उस चारे की व्यवस्था छत पर की गई। जिससे भूख प्यास से भटक रहे पक्षी उसमे आराम से बैठ कर अपनी भूख और प्यास मिटा सकें। साथ ही घर की छत पर मिनी गार्डन बना रखा है। जिसका नाम मन गार्डन रखा है साथ ही विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधे लगा रखे है जिससे पक्षियों को उनके घर जैसा एहसाह हो और वह वहां अपना घोंसला भी बना सके।