10 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

15 सालों की मेहनत से 80 एकड़ खेत में खड़े कर दिए दस हजार से ज्यादा पेड़

प्रकृति के सच्चे पहरेदार, जिन्होंने हरियाली का देखा सपना और साकार करने में जुट गए, समाज के सामने पेश की मिसाल

2 min read
Google source verification

खरगोन

image

Hemant Jat

Jun 05, 2019

5 June Environment Day Special Story

सालों की मेहनत से खेत में तैयार हुए पेड़ों का जंगल।

खरगोन.
पेड़-पौधों की अंधाधुंध कटाई धरती को विनाश की ओर ले जा रही है। जिसके दुष्परिणाम हमारे सामने आ रहे हैं। इस समय खरगोन सहित देश के कई शहरों में भीषण गर्मी से आमजन हालाकान है। ऐसे में सभी की जुबान पर एक ही बात है कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए जाए। जिले में भी कुछ बिरले व्यक्ति है, जिन्होंने हरियाली का सापना देखा और उसे साकार करने में जुट गए। यह आज प्रकृति के सच्चे पहरेदार। कसरावद तहसील के छोटे से ग्राम अकबरपुरा में 15 सालों की कड़ी मेहनत से एक किसान ने 80 एकड़ जमीन पर पेड़ों का जंगल खड़ा कर दिया। आयकर चीफ कमिश्नर प्रतांजलि झा के खेत में आम किसानों की तरह कपास, गन्ना या अन्य फसलों के स्थान पर सुरजना, आम, सागवान, नीम सहित फलदार पौधे लगाए। कई साल देखरेख करने के बाद यह पौधे आज पेड़ों का आकार ले चुके हैं। झा खेत की देखरेख करने वाले खलबुजुर्ग के विक्रम बुधिया बताते है कि उन्होने अपने हाथों से गेत्थी-फावड़े चलाकर एक-एक पौधा लगाया। आज पूरे खेत में 10 हजार से ज्यादा पेड़ हैं। यह अन्य लोगों के लिए भी एक मिसाल है।

बच्चों की तरह की देखभाल
प्रकृति के प्रति विक्रम और उसके परिवार का समर्पण देखते बनता है। उन्होंने पौधों की देखभाल बच्चों की तरह की। आज भले ही वह मजदूर के तौर पर खेत पर काम कर रहे हैं। लेकिन उन्हें इस बात की तसल्ली है कि उनकी मेहनत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। विक्रम के परिवार में पत्नी, चार लड़के और एक बहू है। सभी खेत पर काम करने के साथ पेड़ों की देखभाल में जुटे हैं। विक्रम ने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा, लेकिन वह पेड़-पौधों के साथ हरियाली के महत्व को अच्छे से समझते हैं।

व्यवसायिक सोच, हरियाली में बदली
खेत में पौधे लगाने के पीछे सोच व्यवसायिक थी। लेकिन अब झा परिवार ने इसे पूरी तरह हरियाली को समर्पित कर दिया है। जिसे देखने के लिए सालभर दूर-दूर से लोग आते हैं। खेत पर सागवान, आम, सुरजना, नीम, अमरुद, अनार, पपीता, मौसंबी किस्म के पौधे ज्यादा लगे हैं। अकबरपुरा नर्मदा किनारे बसा एक गांव है।

सामूहिक प्रयासों से विरान पहाड़ी को हरा-भरा बनाया
खरगोन जनपद के ग्राम लोनारा भी सामूहिक प्रयासों से प्रकृति को संवारने के प्रयास किए गए हैं। गांव में सेवार्थ परमार्थ संगठन द्वारा मुक्तिधाम स्थित विरान पहाड़ी को सामूहिक प्रयासां से हरा-भरा बनाया है। संगठन से जुड़े राजाराम मंडलोई बताते है कि 2 जुलाई 2017 को मुक्तिधाम पर 200 से ज्यादा पौधे रोपे गए थे। इनमें नीम, पीपल जैसे छायादार पौधे थे, जो बड़े होने के साथ पेड़ों का रूप ले चुके हैं। पौधे लगाने सहित इनकी सुरक्षा के लिए तार फेंसिंग, सिंचाई के लिए पानी और ड्रिप लाइन बिछाने के लिए ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर लगभग दो से ढाई लाख रुपए खर्च किए। ग्रामीणों ने इस मेहनत से हरियाली केे सपने को साकार करने की मिसाल पेश की है।