3 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

तीन अलग-अलग शरीरों में जिंदा रहेगी ‘अनामिका

बेटी को जन्म देने के बाद मां ने दमतोड़ा, मुश्किल घड़ी में परिवार ने अंगदान का लिया निर्णय, लिवर, किडनी, त्वचा और आंख निकालकर जरुरतमंद मरीजों को दी, खरगोन जिले से दूसरी बार हुआ अंगदान

2 min read
Google source verification

image

asif siddiqui

Jul 02, 2017

'Anamika' will remain alive in three different bod

'Anamika' will remain alive in three different bodies

खरगोन. किसी भी महिला के लिए मां बनने का सुख दुनिया की हर खुशी से बड़ा होता है। वह दूसरी बार मां बनने जा रही थी। इससे वह बड़ी खुश थी। फूल जैसी बेटी को जन्म दिया। वह अभी उसका चेहरा भी ठीक से देख नहीं पाई थी, लेकिन नियती को कुछ ओर मंजूर था। डिलेवरी के चंद मिनटों बाद ही बेटी को मां के प्यार से महरुम होना पड़ा। ये कहानी है मंडलेश्वर निवासी अनामिका पति जितेंद्र जैन (32) की। 26 जुलाई को अनामिका ने धामनोद के निजी अस्पताल में बेटी को जन्म दिया था। सिजेरियन डिलेवरी के दौरान अनामिका को अधिक ब्लडिंग हुई। बीपी बढऩे से वह होश खो बैठी। इंदौर के सेल्बी अस्पताल में ब्रैन डेड होने के बाद परिवार ने अनामिका के अंगदान करने का साहसिक निर्णय। इसके बाद मुस्कान गु्रप के सदस्यों से बातचीत कर इंदौर के चोइथराम अस्पताल में अनामिका की डेड बॉडी लाई गई। यहां बॉडी से लिवर, किडनी, त्वचा और आंखे निकालकर जरुरतमंद लोगों तक पहुंचाई।

खुशी और गम साथ-साथ

जैन परिवार के लिए एक-एक पल भारी पड़ रहा था। पति जितेंद्र जैन ने बताया कि बेटी होने से पूरा परिवार खुश था। डॉक्टरों ने बताया कि अनामिका की हालत ठीक नहीं है। पत्नी के यूं दुनिया छोड़कर जाने के बाद परिवार के सामने मुश्किल घड़ी थी। बेटी की खुशी मनाए या पत्नी की मौत का गम। इस सब के बाद भी जैन परिवार ने साहस का परिचय देते हुए अंगदान का फैसला लिया। अनामिका और जितेंद्र का चार साल का लड़का भी है।

यह है मामला

अनामिका और जितेंद्र की शादी करीब 5 साल पहले हुई थी। महिला का मायका अंजड़ जिला बड़वानी और ससुराल मंडलेश्वर का है। वह ठीकरी में अजीविका मिशन से जुड़कर सरकारी नौकरी कर रही थी। जितेंद्र की धामनोद में प्राइवेट जॉब है। धामनोद में सीजर होने पर अनामिका को अधिक ब्लडिंग हुई। उसकी बच्चदानी फट गई थी। जिसे बाहर निकाला गया। तमाम प्रयासों के बाद भी उसे नहीं बचाया जा सका।



मुस्कान गु्रप ने निभाई भूमिका

इंदौर के मुस्कान गु्रप के सेवादार जीतू बगानी ने बताया कि महिला के बारे में उन्हें पता चला, तो गु्रप के सदस्य तत्काल परिवार से मिला। महिला के ब्रैनडेड होने के बाद मुस्कान गु्रप के सदस्यों ने महिला के भाई और पति की काउंसलिंग कर अंगदान के लिए राजी किया। बगानी ने बताया कि ऐसी स्थिति में किसी भी परिवार को समझाना मुश्किल होता है। जैन परिवार ने साहसिक फैसला लेकर नई मिसाल कायम की।


इन्हें दिए अनामिका के अंग

लिवर:- संजय शुक्ला (35) निवासी चोखीधाणी इंदौर

किडनी:- बाबूसिंह डोडिया निवासी शाजापुर और ममता भट्ट निवासी खजराना, जो की मंदिर के पुजारी की पत्नी है को प्रत्यारोपित किए गए।

ये भी पढ़ें

image