खरगोन. किसी भी महिला के लिए मां बनने का सुख दुनिया की हर खुशी से बड़ा होता है। वह दूसरी बार मां बनने जा रही थी। इससे वह बड़ी खुश थी। फूल जैसी बेटी को जन्म दिया। वह अभी उसका चेहरा भी ठीक से देख नहीं पाई थी, लेकिन नियती को कुछ ओर मंजूर था। डिलेवरी के चंद मिनटों बाद ही बेटी को मां के प्यार से महरुम होना पड़ा। ये कहानी है मंडलेश्वर निवासी अनामिका पति जितेंद्र जैन (32) की। 26 जुलाई को अनामिका ने धामनोद के निजी अस्पताल में बेटी को जन्म दिया था। सिजेरियन डिलेवरी के दौरान अनामिका को अधिक ब्लडिंग हुई। बीपी बढऩे से वह होश खो बैठी। इंदौर के सेल्बी अस्पताल में ब्रैन डेड होने के बाद परिवार ने अनामिका के अंगदान करने का साहसिक निर्णय। इसके बाद मुस्कान गु्रप के सदस्यों से बातचीत कर इंदौर के चोइथराम अस्पताल में अनामिका की डेड बॉडी लाई गई। यहां बॉडी से लिवर, किडनी, त्वचा और आंखे निकालकर जरुरतमंद लोगों तक पहुंचाई।