
24 घंटे में पूर्व मेजर की बेटी अंजना को मिला करोड़ों का मकान (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
UP CM Delivers Justice in 24 Hours: उत्तर प्रदेश में नए साल का पहला दिन एक ऐसी कहानी लेकर आया, जिसने न सिर्फ शासन-प्रशासन की संवेदनशीलता को उजागर किया, बल्कि यह भरोसा भी दिलाया कि अगर पीड़ित की आवाज सीधे सरकार तक पहुंचे, तो न्याय देर से नहीं मिलता। दबंगों की प्रताड़ना की शिकार, पूर्व सैन्य अधिकारी की बेटी अंजना भट्ट को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश पर मात्र 24 घंटे के भीतर उनका करोड़ों रुपये का मकान वापस दिला दिया गया। इस दौरान भूमाफियाओं को गिरफ्तार भी किया गया।
अंजना भट्ट, जिनके पिता मेजर बिपिन चंद्र भट्ट भारतीय सेना में अधिकारी थे, वर्षों से मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना का सामना कर रही थीं। दबंगों की लगातार धमकियों और संपत्ति हड़पने की कोशिशों ने उन्हें इस कदर तोड़ दिया कि वे सिज़ोफ्रेनिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारी की शिकार हो गईं। हालात ऐसे बने कि उन्हें वर्ष 2016 में निर्वाण रिहैब सेंटर में भर्ती कराना पड़ा, जहां वे अब तक उपचाराधीन हैं।
मेजर बिपिन चंद्र भट्ट सेना में कार्यरत थे और राजधानी लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित ए-418 नंबर मकान के स्वामी थे। वर्ष 1994 में उनके निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके एक बेटे और एक बेटी का भी बाद में निधन हो गया। परिवार में केवल अंजना ही शेष बचीं। इसी अकेलेपन का फायदा उठाकर दबंगों ने उनकी संपत्ति पर नजर डाल दी।
चंदौली निवासी बलवंत कुमार यादव और उसका सहयोगी मनोज कुमार यादव ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे अंजना के मकान को अपने नाम कराने की साजिश रच डाली। उन्होंने मकान के बाहर अपना बोर्ड तक लगा दिया और अंजना को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे। अंजना ने इस संबंध में 6 दिसंबर को स्थानीय थाने में प्रार्थना पत्र भी दिया, लेकिन कार्रवाई में देरी होती रही।
जब अंजना को यह जानकारी मिली कि उनका मकान कब्जा कर लिया गया है, तो उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की इच्छा जताई। 31 दिसंबर की शाम मुख्यमंत्री ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया। यह मुलाकात अंजना की जिंदगी का निर्णायक मोड़ साबित हुई। मुख्यमंत्री ने न सिर्फ एक सैनिक की बेटी की पीड़ा को गंभीरता से सुना, बल्कि उसी समय अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि मामले का त्वरित निस्तारण किया जाए।
सीएम के निर्देश मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस हरकत में आ गई। जांच शुरू हुई, फर्जी दस्तावेजों की पुष्टि हुई और गुरुवार (01 जनवरी 2026) को दोपहर से पहले ही अंजना को उनका मकान विधिवत रूप से सौंप दिया गया। जब अंजना को अपने घर में प्रवेश कराया गया, तो यह दृश्य बेहद भावुक था। वर्षों बाद अपने घर की दहलीज लांघते ही उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में अंजना ने घर के हर कमरे में जाकर दीवारों को चूमा। उन्होंने नारियल फोड़ा, दीप प्रज्ज्वलित किया और पुष्प अर्पित कर अपने पिता की यादों को नमन किया। पड़ोस की महिलाओं से लिपटकर वे रोने लगीं और अपने बचपन की बातें साझा करती रहीं। भावनाओं से अभिभूत अंजना के मुंह से बार-बार एक ही वाक्य निकल रहा था-“गॉड ब्लेस यू योगी अंकल!”
निर्वाण रिहैब सेंटर के डॉक्टर संतोष दुबे ने बताया कि 2016 में अंजना को गंभीर मानसिक स्थिति में यहां लाया गया था। इलाज के दौरान जब हमें मकान पर कब्जे की जानकारी मिली, तो थाने में आवेदन दिया गया। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद जो तेजी दिखाई गई, वह काबिले-तारीफ है। 24 घंटे के भीतर अंजना को न्याय मिला।
अंजना की शिकायत के बाद पुलिस ने तत्काल जांच करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एसीपी गाजीपुर अनिंद्य विक्रम सिंह ने बताया कि आरोपी बलवंत कुमार यादव उर्फ बबलू, निवासी नारायणपुर, सैयदराजा (चंदौली)
तथा मनोज कुमार यादव, निवासी दाउदपुर, कोतवाली (चंदौली) को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
यह मामला सिर्फ एक संपत्ति विवाद नहीं, बल्कि संवेदनशील शासन का उदाहरण बन गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिस तेजी से कार्रवाई हुई, उसने यह संदेश दिया कि सैनिक परिवारों का सम्मान सर्वोपरि है,कमजोर और पीड़ित को न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिकता है। भू माफियाओं और दबंगों के लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं।
अंजना के लिए यह सिर्फ मकान मिलने की खुशी नहीं थी, बल्कि यह सम्मान, सुरक्षा और भरोसे की वापसी थी। वर्षों की पीड़ा, डर और असहायता के बाद नए साल का पहला दिन उनके जीवन में रोशनी लेकर आया। यह घटना उत्तर प्रदेश में सुशासन और त्वरित न्याय की एक सशक्त मिसाल बन गई है।
Updated on:
03 Jan 2026 08:51 am
Published on:
03 Jan 2026 08:48 am
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