
परिक्रमा पर मुंबई के संजय ओरा, बबीता, राधिका।
खरगोन. मल्टीनेशनल कंपनी में कभी लाखों की सैलेरी लेकर आलीशान जीवन जीने वाले मुंबई के संजय ओरा ने अचानक ऐसा निर्णय लिया कि हर कोई हैरान रह गया। कभी एयरकंडिशन रूम में बैठकर जॉब करने वाला यह शख्स इन दिनों नर्मदा परिक्रमा कर रहे हैं। आस्था और भक्ति की इस यात्रा में उनके साथ कवडिय़ा गांव की राधिका पाटीदार व बड़वेल गांव की बबीता पाटीदार भी है। शनिवार को तीनों यात्री परिक्रमा करते हुए धरगांव पहुंचे। यहां रात्रि विश्राम किया। ग्रामीणों ने आत्मीय स्वागत किया। रात्रि विश्राम व भोजन व्यवस्था युवाओं समाजसेवी, भाजपा मंडल उपाध्यक्ष चेतन पाटीदार ने की। पत्रिका से विशेष चर्चा में यात्रियों ने अपने अनुभव साझा किए।
मुंबई निवासी 50 वर्षीय संजय बोरा ने बताया वे एक प्रतिष्ठित मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करते थे। प्रतिमाह तीन लाख रुपए वेतन मिल रहा था। सोशल मीडिया पर नर्मदा परिक्रमा से जुड़े वीडियो देखे तो भक्ति की लौ जागृत हुई। इसी बीच उनके पिता रमेश बोरा, जो भारतीय रिजर्व बैंक में सेवारत थे, का कोरोनाकाल में निधन हो गया। पिता के निधन बाद उनके मन में यह भावना जागृत हुई कि वें पिता की आत्मा की शांति के लिए यह पुण्य यात्रा करेंगे। उन्होंने कहा- भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग धन तो कमा लेते हैं, मगर माता-पिता की सेवा और उनके साथ समय बिताना भूल जाते हैं। उनकी नर्मदा परिक्रमा किसी व्यक्तिगत मन्नत की पूर्ति नहीं, बल्कि पिता के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा का प्रतीक है। संजय बोरा ने यात्रा की शुरुआत ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से की।
इसी परिक्रमा टोली में महेश्वर क्षेत्र के कवडिय़ा गांव की 45 वर्षीय राधिका पाटीदार भी शामिल हैं। वे अविवाहित हैं। भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य उपासक हैं। राधिका ने बताया- वह मीराबाई के जीवन, त्याग से प्रभावित हैं। उन्हीं के आदर्शों पर चलते हुए संपूर्ण जीवन ईश्वर भक्ति, साधना और सेवा को समर्पित करना चाहती हैं। उन्होंने 5 नवंबर को ओंकारेश्वर के दक्षिण तट से परिक्रमा प्रारंभ की। राधिका प्रतिदिन लगभग 20 किमी यात्रा करती हैं।
राधिका व संजय के साथ यात्रा कर रही बडवेल की 35 वर्षीय बबीता पाटीदार भी अविवाहित हैं। यह उनकी दूसरी परिक्रमा है। उन्होंने बताया उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर आजीवन मां नर्मदा के तट पर किसी आश्रम में रहकर सेवा करने का दृढ़ संकल्प लिया है। बबीता ने कहा- परिक्रमा मार्ग पर कई स्थानों पर यात्रियों को रुकने, भोजन, आवास की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई बार कई किमी तक सुविधा उपलब्ध नहीं होती। उनका संकल्प है कि महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के दुर्गम क्षेत्र सुलपाणी की झाडिय़ों से सटे खरपत माल मार्ग जैसे कठिन स्थानों पर आश्रम एवं सेवा केंद्र स्थापित किए जाएं, ताकि परिक्रमा वासियों, साधु.संतों और जरूरतमंद श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई न हो।
Published on:
29 Dec 2025 11:21 am
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