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Bridge Card Game: ताश के पत्तों ने दिलाई इस गांव को दुनिया में पहचान, तीसरी बार विदेश जाएंगी यहां की बेटियां

Bridge Card Game: ब्रिज खेल में अजब दीवानगी, रायबिड़पुरा की दो खिलाड़ी जाएंगी क्रोएशिया, तीसरी बार दुनिया में भारत का नाम करेंगी, ताश के पत्तों से शुरू हुआ शौकिया खेल, गांव को दिलाई दुनिया में पहचान...।

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खरगोन

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Manish Geete

Aug 09, 2019

bridge card game

खरगोन। जिला मुख्यालय से करीब 22 किमी दूर छोटा-सा गांव रायबिड़पुरा। पांच हजार की आबादी वाले गांव में ताश के पत्तों वाले अमीरों वाले खेल ब्रिज ( bridge card game ) को लेकर लोगों में अजब की दीवानगी है। इससे गांव को दुनियाभर में पहचान मिली है। यहां से कई खिलाड़ी देश-विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

गांव की विद्या पटेल और कल्पना गुर्जर 20 से 29 अगस्त तक क्रोएशिया में होने वाली प्रतियोगिता में देश के 18 खिलाडिय़ों में शामिल हैं। वे तीसरी बार विदेश में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

इस गांव की इस सफलता को भले राज्य सरकार ने उतना महत्व नहीं दिया पर बीते चार साल में इंगलैंड सहित कई देशों के ब्रिज विशेषज्ञ ट्रेनर रायबिड़पुरा आकर इन खिलाडिय़ों को ट्रेनिंग दे चुके हैं। बिल गेट्स फाउंडेशन भी तकनीकी मदद कर चुका है।

70 के दशक में शुरुआत
गांव के बीच ब्रिज खेल के लिए ग्राम पंचायत का पुराना भवन है, 2012 से किसान ब्रिज क्लब का संचालन हो रहा है। इस क्लब में रोज शाम 7 से 10 बजे के बीच बच्चे, युवा और बुजुर्ग ब्रिज खेल की बारीकियां सीखते हैं। क्लब अध्यक्ष कमल वर्मा बताते है कि गांव में 70 के दशक में ब्रिज खेल की शुरुआत हुई। जब इस खेल के बारे में किसी को पता नहीं था।

1967 में गांव में पदस्थ वेटनरी डॉ. एमजे खान ने ग्रामीणों को ब्रिज खेल की जानकारी दी। धीरे-धीरे लोग इस खेल से जुड़ते चले गए। अभी गांव में 200 ब्रिज खिलाड़ी है। 30 सीनियर और 20 जूनियर खिलाड़ी शामिल हैं। वर्मा का कहना है कि ब्रिज खेल से ब्रेन डेवलप होता है और इससे गांव में सकारात्मक बदलाव भी हुए। गांव की ब्रिज भाषा डॉटकाम नामक अपनी वेबसाइट है।

विश्व स्तर पर मिली पहचान
ब्रिज खेल से रायबिड़पुरा विश्व स्तर पर प्रसिद्धि पा चुका है। पूर्व खिलाड़ी हरीराम पटेल, शिवराम खाटरिया, पंढरी भटानिया, महेश पाटिल ने बताया कि गांव को ब्रिज खेल में जो पहचान मिली, वह गौरव की बात है। 2017-18 में ब्रिज खिलाड़ी कुणाल पटेल व विनय पटेल तथा बालिका वर्ग में कल्पना गुर्जर और विद्या पटेल विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

रायबिड़पुरा में खेल से बदलाव
1. सामाजिक स्तर पर यहां जाति और धर्म का भेदभाव भुलाकर ग्रामीण एक छत के नीचे खेल का आनंद लेते हैंं। रूढि़वादिता और छुआछूत नहीं। गांव में 1982 में सामूहिक विवाह की शुरुआत हुई।
2. शिक्षा के क्षेत्र में ब्रिज खेल में दिमाग पर ज्यादा जोर देना पड़ता है। नियमित खेलने से बच्चों का मस्तिष्क विकसित हुआ है। गांव में बच्चों के गणित में अच्छे माक्र्स आए।
3. एंड्रायल मोबाइल की लत से परिजन परेशान होते हैं, लेकिन ब्रिज खिलाडिय़ों ने इस तकनीक को सफलता का हथियार बनाया। ऑनलाइन विदेशी खिलाडिय़ों से संपर्क बढ़ा।
4. गांव में 250 से अधिक शासकीय शिक्षक है। खेती में भी नवाचार किए दूसरी जगह से हटकर सिर्फ सफेद मूसली, मिर्च और अरंडी की फसल।

पासपोर्ट नहीं होने से इस्तांबुल नहीं जा पाई थीं दोनों
ब्रिज प्लेयर विद्या पटेल और कल्पना गुर्जर टीम इंडिया के 18 ब्रिज खिलाड़ी, दो कोच एवं तीन कैप्टन हिस्सा के साथ क्रोएशिया जाएंगी। इन दोनों का 2016 में इस्तांबुल के लिए चयन भी हुआ था, लेकिन पासपोर्ट और वीजा के अभाव के चलते नहीं जा पाईं। 2017-18 में फ्रांस और चीन में जीत दर्ज की। दोनों अभी अहमदाबाद में ब्रिज ट्रेनर परिमल वालिया से ट्रेनिंग ले रही हैं। सभी ब्रिज खिलाड़ी 14 अगस्त को मुंबई में एकत्रित होंगे, जहां तीन दिन की ट्रेनिंग के बाद 18 अगस्त को क्रोएशिया रवाना होंगे। विधा और कल्पना के साथ कर्नाटक की रेखा भीमनायक और गोवा की केमरान मेनेजिस जोड़ीदार रहेंगी।