भाईयों के प्यारे, बहन के दुलारे और माता पिता के लाड़ले हेमराज जाट ने छोड़ा साथ

भाईयों के प्यारे, बहन के दुलारे और माता पिता के लाड़ले हेमराज जाट ने छोड़ा साथ
भाईयों के प्यारे, बहन के दुलारे और माता पिता के लाड़ले हेमराज जाट ने छोड़ा साथ

Kali Charan kumar | Updated: 04 Sep 2019, 04:23:53 PM (IST) Kishangarh, Ajmer, Rajasthan, India

ढाई साल पहले ही लगी थी नौकरी

मदनगंज-किशनगढ़.

देश के लिए बलिदान हुए शहीद हेमराज जाट के पीछे भरा पूरा परिवार है। हेमराज को खोने के गम के कारण बुढ़े पिता भोलूराम के हाथ पैर कांप रहे थे तो बुढ़ी मां दाखादेवी की रोने से आंखे लाल पड़ गई। सोमवार रात से लगातार रोने के कारण भाई पूसाराम, रामेश्वर, गिरधारी, बंशी और गोपाल की भी आंखें लाल पड़ गई। बहन सोहनी तो बार बार बेहोश हो रही थी।
हेमराज जाट का जन्म 5 जुलाई 1996 को भदूण गांव में ही हुआ था और चार भाईयों और एक बहन के साथ हेमराज सबसे छोटा था। हेमराज ने अपनी 12 वीं तक की स्कूली शिक्षा रूपनगढ़ स्थित तेजा मेमोरियल स्कूल में पूरी की और राजकीय महाविद्यालय किशनगढ़ से बीए की डिग्री ली। बचपन से ही हेमराज में देश के लिए कुछ करने का जज्बा था। वह 12वीं कक्षा के बाद सेना में भर्ती के लिए तैयारियां शुरू कर दी थी और पढ़ाई के साथ-साथ वह घंटों मैदान में दौड़ लगा कर पसीना बहता था। आखिरकार मेहनत का फल मिला और मार्च 2017 में सेना में भर्ती हो गए। करीब करीब ढाई साल की ही सेवा की और 2 सितबर 2019 को दुश्मन सेना के साथ गोलीबारी में शहीद हो गए।
बड़ी संया में लोगों ने दी अंतिम विदाई
शहीद का शव गांव पहुंचने और घर से अंतेष्ठी रवाना होने एवं अंतिम संस्कार होने तक बड़ी संया में लोगों की भीड़ रही। लोग घरों, सरकारी कार्यालयों और आस पास के मकानों की छतों, छज्जों इत्यादि पर खड़े होकर शहीद को अंतिम विदाई दी। शहीद हेमराज का शव रूपनगढ़ थाने से रवाना होने से, घर पहुंचने तक के पूरे रास्ते और अंतेष्ठी कार्यक्रम पूरा होने तक लगभग सभी भारत माता के जयकारे और शहीद हेमराज अमर रहे के नारे लगाते रहे। साथ ही नियमित रूप से पाकिस्तान के खिलाफ भी नारेबाजी होती रही। शव को जुलूस के रूप में आने और अंतेष्ठी स्थल तक ले जाने के साथ अंतिम संस्कार कार्यक्रम तक युवाओं की संया अधिक रही। भीड़ में ज्यादातार युवा वर्ग ही नजर आए।
ताबूद के हाथ लगा कर दी विदाई
अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार कार्यक्रम में लोगों की खासी भीड़ रही। भीड़ के कारण कई लोगों ने तो शहीद के शव के ताबूद के ही हाथ लगाकर नमन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
सुरसुरा धाम के भी किए दर्शन
कश्मीर से भदुण के लाल वीर सपूत हेमराज जाट की शहादत में आए फौजी अफसरों ने अंतेष्ठी कार्यक्रम के बाद सुरसुरा स्थित तेजाजी के धाम के भी दर्शन किए। कैप्टन फूलसिंह, सूबेदार दौलतसिंह, राजेंद्रसिंह, नायक सूबेदार राजेन्द्र चौधरी, गंगाराम गेरा एवं रामलाल ने तेजाजी के दर्शन किए। तेजाजी सेवा समिति सुरसरा के सदस्यों ने उनका माला पहना कर तेजाजी महाराज की स्मृति चिन्ह देकर समान किया। तेजाजी समिति के सदस्य श्रवणलाल बड़वाल, सीताराम प्रजापत, अमरचंद वैष्णव, तरुण सोनी, तेजपाल सैनी एवं विश्राम चौधरी इस मौके पर मौजूद रहे।

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