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Kishangarh : महंगे कॉटन से 30 प्रतिशत से अधिक बढ़े कपड़ों के दाम, मंडिय़ों में घटी मांग

महंगे कॉटन से 30 प्रतिशत से अधिक बढ़े कपड़ों के दाम, पर मंडिय़ों में घटी मांगतैयार माल की बिक्री को लेकर पावरलूम उद्यमी को सतानें लगी चिंतापावरलूम उद्योग को सरकारी प्रोत्साहन की जरुरत

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Kishangarh : महंगे कॉटन से 30 प्रतिशत से अधिक बढ़े कपड़ों के दाम, मंडिय़ों में घटी मांग

Kishangarh : महंगे कॉटन से 30 प्रतिशत से अधिक बढ़े कपड़ों के दाम, मंडिय़ों में घटी मांग

कालीचरण
मदनगंज-किशनगढ़.
गर्मी बढऩे एवं अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में रूई के भावों में आई अत्प्रत्याशित तेजी से कॉटन के कपड़े भी 30 प्रतिशत से अधिक महंगे हो गए है। कॉटन के कपड़ों में आई तेजी की वजह से अब कपड़ा व्यापारियों ने भी खरीदारी में रूचि दिखाना कम कर दिया है। ऐसी स्थित में एक बार फिर किशनगढ़ का पावरलूम उद्योग और उद्यमी दोनों पर मंदी की मार का संकट मंडराने लगा है। भले ही केंद्र सरकार ने कॉटन पर इम्पोर्ट ड्यूटी हटा दी हो, लेकिन इसका भी फिलहाल जमीनी स्तर पर असर नहीं आ रहा है।
कोविड महामारी के संकट के बादल छटने के बाद पावरलूम उद्योग को गति मिलने का इंतजार कर रहे पावरलूम उद्यमियों को अभी राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है। गर्मी बढऩे और रूई के अन्तर्राष्ट्रीय दामों में बढ़ोत्तरी के साथ ही घरेलू बाजार में कॉर्टन के धागे (यार्न/कच्चा माल) में 30 प्रतिशत से अधिक इजाफे से तैयार कॉटन के कपड़ों की कीमतें भी 20 से 30 फीसदी बढ़ गई है। कहने को तो भले ही पंजाब एवं हरियाणा की कपड़ा मंडिय़ों में तेजी बताई जा रही है। लेकिन इन मंडिय़ों में भी पावरलूम फैक्ट्रियें की लूमों पर तैयार होने वाले कॉटन के कपड़ों में रूचि कम नजर आ रही है। इस मुख्य कारण कॉटन के कपड़ों का 30 फीसदी अधिक महंगे होना है। यहीं वजह है कि इस कपड़े की पंजाब और हरियाणा या अहमदाबाद इत्यादि कपड़ा मंडिय़ों में डिमांड कम है। बीते चार महीने में धागे की कीमतों में 30 प्रतिशत से अधिक तेजी है। जबकि अधिक लागत से तैयार यहां के कॉटन के कपड़ों की नाममात्र डिमांड है। ऐसे में यहां के कारोबारियों को चिंता सता रही है कि अधिक लागत पर तैयार कपड़े का स्टॉक यदि बिक्री नहीं हुआ तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना भी पड़ सकता है और इस वजह से यहां प्रतिदिन 5 से 6 करोड़ के कारोबार के अब प्रभावित होने की चिंता है। क्योंकि कॉटन के कच्चे माल की कीमतें बढऩे के बावजूद फैक्ट्रियों के संचालन के लिए खरीदना मजबूरी बनी हुई है। लेकिन करीब 25 से 30 प्रतिशत अधिक महंगें कपड़ों को मंडिय़ों में बेच पानी टेडी खीर साबित हो सकती है।
कच्चे माल का आयात
किशनगढ़ के पावरलूम कारोबारी 75 प्रतिशत सूती धागा (यार्न/कच्चा माल) पंजाब और हरियाणा से ही मंगवाते है। शेष 25 प्रतिशत कच्चा माल साउथ जयपुर समेत अन्य छोटी बड़ी मंडिय़ों से मंगवाते है।
तैयार माल की बिक्री
किशनगढ़ की लूमों पर तैयार होने वाला कॉर्टन के कपड़े की 75 प्रतिशत खपत जयपुर, सांगानेर और अहमदाबाद की मंडिय़ोंं मेंं है। शेष 25 प्रतिशत दिल्ली, अहमदाबाद एवं दिल्ली बिक्री के लिए भेजा जाता है।

अभी हाल ही में केंद्र सरकार ने कॉटन की इम्पार्ट ड्यूटी भी हटा दी है। लेकिन इसका असर फिलहाल जमीनी स्थित पर दिखाई नहीं दे रहा है। पावरलूम उद्यमी महंगें भाव का कच्चा माल खरीद कर उसे कम कीमत पर कैसे बेच सकते है।
-अरविंद गर्ग, उद्यमी, पावरलूम।

फैक्ट्रियां संचालित करने के लिए महंगा कच्चा माल खरीदना मजबूरी बनी हुई है। अधिक लागत पर तैयार कपड़ों की यदि जल्द खपत नहीं होती है तो यह उद्योग और उद्यमी दोनों के लिए चिंता की बात है।
-कमल तापडिय़ा, उद्यमी, पावरलूम।

पावरलूम उद्योग एक नजर
-पावरलूम उद्योग : वर्ष 1965 से संचालित
-यूनिटें : 800 से 1000
-उद्यमी : 300
-श्रमिक : 15 हजार
-साधरण लूमें : 5000
-ऑटो एवं सेमी ऑटो लूमें : 1500 से 2000