
409 वर्ष का हो जाएगा हमारा किशनगढ़
मदनगंज-किशनगढ़ (अजमेर).
अपनी कला-संस्कृति और उद्यमिता के लिए प्रसिद्ध हमारा शहर इस बसंत पंचमी पर 409 वर्ष का हो जाएगा। इतिहासकारों के अनुसार विक्रम संवत 1668 (सन 1611) बसंत पंचमी को तत्कालीन महाराजा रहे किशनसिंह ने किशनगढ़ की नींव रखी थी। किशनगढ़ अब विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। गौरवशाली अतीत का धनी यह नगर एयरपोर्ट के कारण सीधे वैश्विक उड़ान नक्शे पर आ चु़का है। यहां से दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद के लिए उड़ाने संचालित हैं। अब मुंबई सहित अन्य शहरों के लिए उड़ाने शुरू होने का इंतजार है। इतिहास में संत नागरीदास और बणी-ठणी चित्र शैली (राधा स्वरूप) के लिए प्रसिद्ध किशनगढ़ वर्तमान में मार्बल नगरी के रूप मेंं पहचाना जा रहा है। यहां एशिया की सबसे बड़ी मार्बल मंडी है। पिछले कुछ सालों में यहां तेजी से ग्रेनाइट इकाइयां भी लगी हंै। इस कारण यह बड़े गे्रनाइट हब के रूप में विकसित हुआ है। नगर की आबादी पौने दो लाख से अधिक हो गई है।
बसंत पंचमी पर रखी नींव
इतिहासकार अविनाश पारीक ने बताया कि किशनगढ़ के संस्थापक महाराजा किशनसिंह ने विक्रम संवत 1668 की माघ सुदी पंचमी (बसंत पंचमी) को गुंदोलाव झील किनारे कृष्णगढ़ की स्थापना की थी। महाराजा किशनसिंह का जन्म विक्रम संवत 1632 में कार्तिक सुदी अष्टमी को जोधपुर में हुआ था। किशनगढ़ की चारदीवारी के भीतर का हिस्सा पुराना शहर और काफी समय बाद निकट के बाहरी क्षेत्र की बसावट नया शहर के रूप में हुई। इस दुर्ग को किशनगढ़ और हरिदुर्ग के नाम से भी पुकारा गया है। यहां के तत्कालीन शासकों ने अपनी कुशलता से मुगल राज और ब्रिटिश शासन में अपना महत्व बनाए रखा। इस रियासत में 210 गांव शामिल रहे। महत्वपूर्ण स्थान पर होने के कारण यह व्यापारिक केंद्र के रूप में भी विकसित हुआ। वर्तमान मदनगंज की स्थापना लगभग सौ वर्ष पूर्व रेलवे लाइन के निकट की गई थी। किशनगढ़ स्वामी विवेकानंद के जीवन से भी जुड़ा हुआ है। यहां स्वामी विवेकानंद अपने जीवनकाल में दो बार आए थे और रामकृष्ण मिशन के माध्यम से सेवा कार्य किए थे।
मौखम विलास का कायाकल्प
नगर में पर्यटन के लिहाज से मौखम विलास का अपना ही महत्व है। राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण की ओर से यहां संत नागरीदास पैनोरमा बनाया गया है। यहां तक सड़क का निर्माण अभी बाकी है। इसके साथ ही नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में मौजूद विरासतों की मरम्मत एवं रखरखाव किया जाना चाहिए। नगर के पुराना शहर स्थित नवग्रह मंदिर का भी जीर्णोद्धार हो चुका है। प्रखर उद्यमिता के धनीनगर के निवासी उद्यमिता और व्यापार की प्रतिभा के धनी है। यहां के उद्यमियों और व्यापारियों को प्रोत्साहित किया जाए तो क्षेत्र के विकास में तेजी आएगी और हजारों युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। इसके साथ ही वर्तमान में सिलोरा स्थित रीको एरिया काफी विकसित हो चुका है। पावरलूम उद्योग और अन्य उद्योग भी यहां संचालित है। यहां नई मिलों और फूड प्रोसेसिंग यूनिटों की स्थापना एवं नए गोदामों का निर्माण हो तो किसानों को उपज के अच्छे दाम मिल सकेंगे, जिससे उनकी आर्थिक हालत में सुधार आएगा। शिक्षा केंद्र के रूप में विकास क्षेत्र में शिक्षा का भी पर्याप्त विकास हो रहा है। उपखंड क्षेत्र के बांदर सिंदरी में वर्ष 2009 में राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। यहां राजकीय महाविद्यालय के साथ ही अजमेर रोड पर आर.के. पाटनी कन्या महाविद्यालय भी संचालित है। इसके साथ ही राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर में केंद्रीय विद्यालय भी संचालित है।
Published on:
29 Jan 2020 01:29 am
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