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Powerloom Fabric Business : संकट में पावरलूम उद्योग, कपड़े की घट रही मांग

ऑटो लूमों की तुलना में बुनाई खर्च अधिक : जयपुर और अहमदाबाद की मंडी में घटी किशनगढ़ के कपड़े की डिमांड

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Powerloom Fabric Business : संकट में पावरलूम उद्योग, कपड़े की घट रही मांग

Powerloom Fabric Business : संकट में पावरलूम उद्योग, कपड़े की घट रही मांग

मदनगंज-किशनगढ़. इन दिनों किशनगढ़ का पावरलूम उद्योग पर संकट के बादल मंडरा रहे है। ऑटो लूमों की तुलना में साधारण लूमों के कपड़े की लागत खर्च बढऩे उद्यमियों ने व्यापार में रुचि दिखाना कम कर दिया है। वहीं जयपुर व अहमदाबाद की मंडिय़ों में बढ़ते पानीपत के कपड़े की डिमांड के चलते किशनगढ़ पावरलूम उद्योग पर की मांग कम हो गई है और यही वजह है कि इन दिनों तकरीबन 50 प्रतिशत प्रोडक्शन कम हो गया है।

अक्टूबर महीने में मजदूरों की वेतन बढ़ोत्तरी से बढ़े भार के साथ ही अब ऑटो लूम की तुलना में साधारण लूमों पर कपड़े की बुनाई खर्च भी अधिक हो गया है। ऑटो लूम एवं साधारण लूमों पर तैयार किए जाने वाले कपड़े की बुनाई खर्च डेढ से दो रुपए मीटर अधिक आती है। यही वजह है कि लगातार उद्यमियों और उद्योग पर आर्थिक भार ने उद्योग की कमर तोड़ कर रख दी। कई पावरलूम उद्यमियों का कहना है कि इन दिनों पावरलूम उद्योग अपनी अंतिम सांसें ले रहा है। यह भी बताया जा रहा है कि जहां अहमदाबाद और जयपुर में पहले किशनगढ़ के कपड़े की डिमांड रहा करती थी, लेकिन अब इन मंडिय़ों में पानीपत से तैयार कपड़े की डिमांड है और पानीपथ के कपड़े ने इन दोनों बड़ी मंडिय़ों में अपने पैर पसार लिए हैं। इसका असर किशनगढ़ के पावरलूम उद्योग पर पड़ा है। उद्यमियों ने बताया कि जहां पूर्व में 24 घंटे पावरलूम चलती थी और दिनरात लूमों पर कपड़ा तैयार होता था। लेकिन वर्तमान में कोई लूम 8 घंटे तो कोई लूम 12 या 16 घंटे ही चलाई जा रही है।

पावरलूम उद्योग एक नजर

-पावरलूम फैक्ट्रियां : 500

-पावरलूम लूमें : 4500

-पावरलूम उद्यमी : 200

-पावरलूम मजदूर : 10 हजार (प्रत्यक्ष एवं परोक्ष)।

लागत और साइजिंग चार्ज की मार

किशनगढ़ का पावरलूम उद्योग दयनीय स्थिति में पहुंच चुका है और अपनी अंतिम सांसें ले रहा है। व्यापारियों की पावरलूम उद्योग में रुचि नहीं है। मजदूरी वृद्धि और साइजिंग चार्ज बढ़ोत्तरी के बाद उद्योग पर भार बढ़ा।

-अरविंद गर्ग, उद्यमी पावरलूम

मुश्किल दौर में पावर लूम उद्यमीऑटो लूम की तुलना में साधारण लूमों पर कपड़े की बुनाई खर्च अधिक है और करीब डेढ से दो रुपए का अंतर है। पावरलूम उद्योग अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। कई फैक्ट्रियां तो बंद है और कआई मजबूरीवश चलाई जा रही है।

-कमल तापडिय़ा, उद्यमी पावरलूम