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Workshop…नवाचारी विचार के प्रति सजग रहें

आरके पाटनी गल्र्स कॉलेज में राष्ट्रीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम

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Workshop...नवाचारी विचार के प्रति सजग रहें

Workshop...नवाचारी विचार के प्रति सजग रहें

मदनगंज-किशनगढ़। आरके पाटनी गल्र्स कॉलेज में विज्ञान एवं तकनीकी विभाग, राजस्थान सरकार के सहयोग से भौगोलिक संकेतन पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में प्रथम तकनीकी सत्र के आई. पी. आर. विशेषज्ञ पंकज कुमार ने कहा कि भौगोलिक संकेतन, बौद्धिक सम्पदा अधिकार का ही एक स्वरूप है जो कि किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र और उसकी विशेषता को सुरक्षा, संरक्षण और वैधानिकता प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि नवाचार, अन्वेषण और उपयोगिता वह प्रमुख आधार हंै जिससे किसी भी वस्तु और विचार को पेटेन्ट कराया जा सकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हमें अपने नवाचारी विचार के प्रति सजग रहना चाहिए। निर्धारित प्रक्रिया द्वारा उसे पंजीकृत भी कराना चाहिए अन्यथा उस विचार का दुरूपयोग हो सकता है और वास्तविक व्यक्ति की जगह दूसरे उसका लाभ भी उठा सकते हैं।
कार्यशाला के द्वितीय तकनीकी सत्र में आई.पी. अर्टोनी विकास असावत ने बताया कि बौद्धिक सम्पदा अधिकार हमारी पहचान का आधार है। इसे प्राप्त करने से न केवल हमारी पहचान बनती है बल्कि वास्तविक व्यक्ति को कार्य करने की प्रेरणा भी मिलती है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के पंजीकरण को लेकर कई प्रकार के भ्रम हंै, हमें इसे समझकर पंजीकरण की प्रक्रिया में हिस्सा लेना चाहिए।
उन्होंने पेटेन्ट के लिए आवेदन करने की विधिवत प्रक्रिया, दस्तावेज और सावधानियों से सभी प्रतिभागियों को अवगत कराया। इस अवसर पर सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय, अजमेर की सहायक आचार्य डॉ. सीमा गर्ग ने अपने पेटेन्ट हर्बल जिलेटिन को प्राप्त करने की प्रक्रिया से जुड़े अपने अनुभवों को प्रतिभागियों के साथ साझा किया।