
नीट में मिला 180 रैंकिंग, पढऩे गया तो लोगों ने क्यों कर दिया जानलेवा हमला, जानें
कृष्णदास पार्थ
कोलकाता.
बेहद गरीब परिवार का प्रतिभावान छात्र पी मुखर्जी मेडिकल की नीट परीक्षा में ऑल इंडिया में 180 रैंकिंग लाया था। उसको चिकित्सा शिक्षा पढऩे का मौका एनआरएस मेडिकल अस्पताल और कॉलेज में मिला। लेकिन इस प्रतिभावान छात्र पर सोमवार को एक मरीज के परिजनों ने जानलेवा हमला कर दिया। उसके सिर में गंभीर चोट आई है। उसको न्यूरो साइंस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उसकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। इससे नराजा उसके साथी छात्रों, जूनियर डॉक्टरों और वरिष्ठ डॉक्टरों ने पूरे राज्य में चिकित्सा सेवा देना बंद कर दी है। इससे राज्य प्रशासन हिल गया है। दूर-दराज से इलाज के लिए आने वाले मरीजों में त्रही-त्राही हो रही है। लेकिन मंगलवार की रात तक प्रदर्शन पर उतारू जूनियर डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा था। सोमवार की रात से जूनियर डॉक्टरों के विरोध के कारण एनआरएस अस्पताल की लगभग सभी सेवाएं बंद हो गई है। आउटडोर बंद होने से दूर-दूर से आनेवाले मरीजों को निराश होकर वहां से लौट जाना पड़ रहा है। बिगड़ती स्थिति को देख राज्य के स्वास्थ्य और शिक्षा निदेशक प्रदीप मित्रा भी मंगलवार की सुबह एनआरएस अस्पताल पहुंचे। उन्होंने जूनियर डॉक्टरों से काम पर वापस आने के लिए कहा, लेकिन डॉक्टरों ने इनकार कर दिया। डॉक्टरों की मांग थी कि पहले उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
बुधवार को भी सेवा बंद करने पर अड़े हैं डॉक्टर
-परेशान हुए अस्पतालों में जानेवाले मरीज
-मामले में ४ को किया गया है गिरफ्तार
-जूनियर डॉक्टरों ने किया सड़कों पर प्रदर्शन
कोलकाता
महानगर के नीलरतन सरकार अस्पताल में एक मरीज की मौत होने से नाराज उसके परिजनों ने एक जूनियर डॉक्टर पर हमला कर दिया। हमले में जूनियर डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हो गया है। वह अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ रहा है। वहीं इस घटना के विरोध में मंगलवार सुबह से ही राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा बंद कर दी गई। बुधवार को भी सेवा बंद रखने पर डॉक्टर अड़े हुए हैं। प्रशासन की ओर से उन्हें मनाने का प्रयास किया जा रहा है।
मंगलावर को एनआरएस समेत सभी सरकारी अस्पतालों के आउटडोर पूरी तरह बंद रहे। आपातकाल विभाग की स्थिति और भी खराब थी। राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों के जूनियर डॉक्टरों ने सेवा बंद कर दी थी। इस घटना में पुलिस ने ५ लोगों को गिरफ्तार किया है। उनके नाम आदिल हारून, नईम खान, मो.शाहनवाज आलम, मो.निजामुद्दीन व अफरोज आलम बताए जा रहे हैं।
मालूम हो कि रविवार को टेंगरा के निवासी ७५ वर्षीय मोहम्मद सईद को सांस कष्ट क ी समस्या के कारण नीलरतन सरकार अस्पताल में भर्ती कराया गया। पहले सईद को जनरल वार्ड में रखा गया, उसके बाद उसे कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में भर्ती कराया गया। सोमवार शाम को ६ बजे सईद की मौत हो गई। वहीं सईद के परिजनों ने डॉक्टरों पर चिकित्सा में लापरवाही का आरोप लगाते हुए एक जूनियर डॉक्टर को बुरी तरह से पीटा। यहां तक जूनियर डॉक्टर को बचाने गए लोगों को भी मरीज के परिजनों ने पीटा। इस घटना के विरोध में सोमवार रात से ही डॉक्टरों ने काम करना बंद कर दिया। रात में ही डॉक्टरों ने अस्पताल का मेन गेट बंद कर दिया व उस पर संदेश लिखा कि अब अस्पताल बंद हो चुका है, अब यहां कोई चिकित्सा नहीं होगी। डॉक्टरों ने सुरक्षा की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया।
नीलरतन सरकार के जूनियर डॉक्टरों ने बताया कि जिसे पीटा गया है उसकी हालत गंभीर है। मंगलवार को पश्चिम बंगाल के चिकित्सा शिक्षा विभाग के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार मित्रा ने नीलरतन सरकार अस्पताल का दौरा किया और धरने पर बैठे डॉक्टरों की प्रदर्शन को वापस लेने की अपील करते हुए कहा कि जो भी कार्रवाई अपराधियों के खिलाफ होनी है वह जरूर होगी।
सभी सरकारी अस्पतालों में सेवा प्रभावित
नीलरतन अस्पताल में जूनियर डॉक्टर को पीटे जाने के बाद राज्य के सारे अस्पतालों में डॉक्टरो ने सेवा बंद कर दी। कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज, मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज, बर्दवान मेडिकल कॉलेज, कलकत्ता मेडिकल कॉलेज, एसएसकेएम, आरजीकर मेडिकल कॉलेज समेत सभी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों ने सारे विभाग मे चिकित्सा बंद कर दी है। कई अस्पतालों में गंभीर हालत के मरीज पहुंचे पर उन्हें कोई सेवा नहीं मिली। यहां तक कि एक के बाद एक अस्पताल में सेवा बंद होती चली गई। मरीजों के परिजनों का आरोप है कि हम गंभीर हालत वाले मरीजों को लेकर कहां जाएं।
मामले की होगी जांच
राज्य की स्वास्थ्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने एनआरएस अस्पताल का दौरा किया। उनको भी प्रदर्शनकारियों के विरोध का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने उनके सामने नारे लगाए और अपने लिए बेहतर सुरक्षा की मांग की। मंत्री ने कहा कि पूरे मामले की जांच होगी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है। डॉक्टरों से कहा है कि वे प्रदर्शन बंद कर मरीजों का इलाज करें। बाकी मामले की जांच हो रही है। यह सम्मानीय पेशा है, मरीजों के परिजनों को यह ध्यान रखना चाहिए।
स्थिति संभालने को पहुंचे कोलकाता पुलिस आयुक्त
नीलरतन सरकार अस्पताल में परिस्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोलकाता पुलिस आयुक्त अनुज कु मार अस्पताल पहुंचे। जूनियर डॉक्टरों ने उनके सामने भी प्रदर्शन किया। जूनियर डॉक्टरों ने पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाया है। कोलकाता पुलिस आयुक्त ने डॉक्टरों से बात कर परिस्थिति नियंत्रित करने की कोशिश की।
Published on:
11 Jun 2019 08:13 pm
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