
Chaitanya Mahaprabhu: ऐसा अद्भूत संग्रहालय जहां चैतन्य महाप्रभु के साथ कीर्तन करने का होगा अनुभव, जाने कैसे
New generation को आकर्षित करने के लिए ऑडियो ट्रैक और एनिमेट्रॉनिक्स आधुनिक संसाधन भी उपलब्ध
कोलकाता
भगवान कृष्ण में आस्था और गुरु की सेवा के जरिए जातिगत और धार्मिक व्यवस्था से मुक्त हो कर गहन मानव प्रेम से दिव्य प्रेम प्राप्त करने की राह दिखाने वाले १६ वीं सदी के संत और समाज सुधारक चैतन्य महाप्रभु पर हाई-टेक संग्रहालय बन कर तैयार हो गया है। गौड़ीय मठ ने इसे कोलकाता के बागबाजार स्थित अपने प्रांगण में बनाया है। इस महान संत के जीवन और दर्शन को समर्पित 'श्री चैतन्य महाप्रभु संग्रहालय' विश्व का एकलौता है, जिसमें महान संत चैतन्य से मिली विरासत और उनकी यादों को संरक्षित किया गया है।
इसके साथ ही कोलकाता का यह पहला हाई-टेक म्यूजियम तीन मंजिलों में फैला है। इसका आर्किटेक्चर डीजाईन अमरिका के विश्व प्रसिद्ध
वल्र्ड ट्रेड सेन्टर का वास्तु कला तैयार करने वाले वास्तुकार गोपाल मित्र ने तैयार किया है, जिनका पिछलने दिनों निधन हो गया। संग्रहालय में गैलरी, सभागार, संग्रह, ध्यान कक्ष, पुस्तकालय, अंतरिक्ष थिएटर है। इसका प्रत्येक मंजिल संत महाप्रभु के जन्म से ले कर विवाह, सन्यास (संतसुख) लेने और उनका देश भ्रमण से जुड़ी स्मृतियों को समर्पित है। इसमें संत के संस्मरण, कलाकृतियों, पांडुलिपियों, दुर्लभ पुस्तकों, चित्रों और अन्य मूल्यवान प्रदर्शन का समृद्ध संग्रह और आधुनिक संसाधन हैं।
चैतन्य महाप्रभु पर आधारित दुनिया का यह पहला संग्रहालय आधुनिक संचार विधियों और तकनीक से लैस है, जिसके जरिए चैतन्य पंथ के अभिलेखीय साहित्य का संग्रह, संरक्षण और प्रसार होगा। इसमें लोग चैतन्य महाप्रभु के मूल हस्त-लेखन की झलक पाएंगे हैं और नगर संकीर्तन को चित्रित करने के लिए वर्चुअल वाल यानि आभासी वास्तविक दिवाल बनाए गए हैं, जहां आगंतुक महसूस करेंगे कि वे चैतन्य महाप्रभु के मण्डली के साथ कीर्तन कर रहे हैं।
चैतन्य महाप्रभु के उपदेशों और वैष्णव आस्था का प्रचार के लिए 1935 में स्थापित गौड़ीय मिशन के सहायक सचिव और संग्राहलय प्रभारी मधुसूदन महाराज ने बताया कि चैतन्य महाप्रभु आज भी प्रासंगिक हैं। हम समाज में प्रचलित क्रूरूरता, ङ्क्षहसा या असहिष्णु स्थितियों के बीच महाप्रभु के उपदेशों और दूरदृष्टि का प्रदर्शन कर समाज की सेवा करना चाहते हैं। यह संग्रहालय हमारा ड्रीम प्रोजेक्ट है, जो 13 अगस्त को पूरा हो जाएगा।
- संग्रहालय का उद्देश्य वैष्णव विरासत का संरक्षण
भक्त निष्ठ मधुसूदन महाराज ने बताया कि इसे सिर्फ भक्तों तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि उनका उद्देश्य समाज में संदेश फैलाना है। गौैड़ीय मिशन चाहता हैं कि शोधकर्ता, बौद्धिक और विद्वान पुस्तकालय की सुविधाओं का लाभ उठाएं और संग्रहालय जाकर महाप्रभु के विस्तृत जीवन का अनुभव करें।
उन्होंने कहा कि इस संग्राहलय में जीवंत मॉडल, 3 डी फिल्में, ऑडियो ट्रैक और एनिमेट्रॉनिक्स आगंतुकों के अधिकतम जुड़ाव को सुनिश्चित करेंगे। संग्रहालय वर्तमान पीढिय़ों के बीच जागरूकता पैदा करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहता है, इसका प्राथमिक उद्देश्य तेजी से गायब हो रहे वैष्णव विरासत, जीवित परंपराओं के साथ-साथ अमूर्त विरासत के सभी सबूतों को संरक्षित करना है।
Published on:
09 Aug 2019 07:23 pm
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