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पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर में लिखा जा रहा एक नया अध्याय: अभिषेक बनर्जी

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अपने लोकसभा क्षेत्र डायमंड हार्बर में आम लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सेवाश्रय शिविर खोला है। अभिषेक के कार्यालय के अनुसार शिविर में बड़ी संख्या में लोग चिकित्सा करवाने आ रहे हैं। स्वयं अभिषेक ने कहा है कि एक लोकसभा केंद्र कैसे स्वास्थ्य व्यवस्था के क्षेत्र में क्रांति की ओर ले जा सकता है, डायमंड हार्बर में इसका एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। सेवाश्रय के चिकित्सा शिविरों में हो रही आम लोगों की भीड़ इसका साक्षी है।

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पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर में लिखा जा रहा एक नया अध्याय: अभिषेक बनर्जी

पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर में लिखा जा रहा एक नया अध्याय: अभिषेक बनर्जी

बोले, एक लोकसभा क्षेत्र कैसे ला सकता है स्वास्थ्य सेवा में क्रांति, शिविर में हो रही लोगों की भीड़ ही है जवाब

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अपने लोकसभा क्षेत्र डायमंड हार्बर में आम लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सेवाश्रय शिविर खोला है। अभिषेक के कार्यालय के अनुसार शिविर में बड़ी संख्या में लोग चिकित्सा करवाने आ रहे हैं। स्वयं अभिषेक ने कहा है कि एक लोकसभा केंद्र कैसे स्वास्थ्य व्यवस्था के क्षेत्र में क्रांति की ओर ले जा सकता है, डायमंड हार्बर में इसका एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। सेवाश्रय के चिकित्सा शिविरों में हो रही आम लोगों की भीड़ इसका साक्षी है। दूसरी ओर विपक्षी पार्टियों ने सवाल किया कि रोजमर्रा के इलाज के लिए क्या पर्याप्त सरकारी बुनियादी ढांचा नहीं है। अभिषेक ने इस परियोजना को दो जनवरी को शुरू किया। उनके लोकसभा क्षेत्र के प्रत्येक सात विधानसभा क्षेत्रों में कम से कम 40 शिविर लगाए गए हैं, जिनमें प्राथमिक चिकित्सा, शारीरिक जांच और आवश्यक सलाह देने के लिए 1200 डॉक्टर तैनात किए गए हैं। इन शिविरों में विभिन्न जांच, आवश्यक परामर्श और आवश्यकतानुसार कोलकाता के सरकारी अस्पताल में प्रवेश की व्यवस्था की जाती है।

पहले सात दिन में आए 10 हजार लोग

सांसद कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, पहले सात दिनों में डायमंड हार्बर कैंप में 10 हजार लोग आए। अब तक 32 हजार से ज्यादा जांच हो चुची हैं। कुल 1,631 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस कार्यक्रम को लागू करने के लिए डॉक्टरों, चिकित्साकर्मियों के अलावा सांसदों का एक बड़ा समूह भी काम कर रहा है। इन शिविरके प्रभाव का भी प्रचार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, शिविरों के चलाने में करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। तृणमूल के डायमंड हार्बर संसदीय दल के साथ-साथ कई 'शुभचिंतक' इसका खर्च उठाने के लिए आगे आए हैं।

पूरे राज्य में लगाने चाहिए इस तरह के शिविर

अभिषेक ने बताया कि पिछले 10-15 वर्ष में राज्य में कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल खुले हैं। फिर भी अंतिम चरण में उपचार सुनिश्चित करने के लिए हमने अपने संसदीय क्षेत्र में छह से सात बूथों वाला एक क्लस्टर बनाया है। वहां छह से सात हजार लोगों को सेवाएं मिलेंगी। वह पूरे प्रदेश में इस तरह के चिकित्सा शिविर लगाकर चिकित्सा व्यवस्था को भी बढ़ावा देना चाहते हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि यदि अन्यत्र भी जन प्रतिनिधि इस तरह की पहल करेंगे तो मैं उन्हें मदद करूंगा।

लोगों को आवश्यक चिकित्सा उपलब्ध कराने में सरकार विफल

अभिषेक की पहल चिकित्सा मुद्दों के समाधान के लिए सरकार के प्रयासों के समानांतर है। कई तृणमूल विधायकों ने पहले ही अपने निर्वाचन क्षेत्रों में ऐसी चिकित्सा सेवाएं देने के लिए अभियान शुरू कर दिया है। विपक्ष ने सरकारी व्यवस्था को लेकर सत्ताधारी दल की मांग पर सवाल उठा रहे हैं। राजनीतिक स्तर पर शुरू हुई इस योजना ने अब राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को समग्र स्वास्थ्य सेवा को लेकर असहज कर दिया है। यह असहजता इसलिए भी अधिक है, क्योंकि राज्य का स्वास्थ्य विभाग ममता बनर्जी के पास है।विपक्षी दलों का तर्क है कि कुछ दिनों में डायमंड हार्बर में आयोजित चिकित्सा शिविरों में हो रही लोगों की भीड़ ही इस सवाल का जवाब भी है कि क्या राज्य सरकार आम लोगों को आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में विफल है। शिविरों में लोगों की भीड़ के मद्देनजर इस प्रश्न का उत्तर है हां।

समानांतर व्यवस्था चला रहे अभिषेक: शमिक

प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता और सांसद शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल में संवैधानिक ढांचा ध्वस्त हो गया है। एक तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गंगासागर जाकर रक्षा मुद्दों पर बात कर रही हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री के उत्तराधिकारी अभिषेक सरकारी सुविधाओं का उपयोग कर समानांतर व्यवस्था चला रहे हैं। माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि बुआ और भतीजे मिलकर अद्भुत खेल खेल रहे हैं। सरकारी संसाधनों, अवसरों और सरकारी मेशीनरी का उपयोग से डॉयमंड हार्बर मॉडल को पेश करने की कोशिश की जा रही है। अभिषेक की यह पहल सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली पर सवाल नहीं उठा रही है।