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बंगाल का यह तूफान देता है गर्मी में राहत, नाम है कालबैशाखी

हवाओं के मिलन के कारण मूसलाधार वर्षा होती है।तेज़ मूसलाधार वर्षा के साथ-साथ तीव्र गति के तूफ़ान भी आते हैं।

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कोलकाता. पश्चिम बंगाल में मकर संक्रान्ति के बाद से ही परिवर्तित होने वाला मौसम फरवरी के अंत तक चिपचिपी गर्मी लाने लगता है। तब दिन भर की उमस भरी गर्मी से राहत दिलाने के लिए उत्तरपश्चिम से तेज हवाएं आती हैं। जिन्हें कालबैशाखी कहते हैं। अमूमन मार्च की शुरुआत से लेकर मानसून के आने तक सक्रिय रहने वाले इस स्थानीय मौसम कारक को लेकर बांग्ला साहित्य में भी बहुत कुछ लिखा गया है। बादल घिरने से शुरू होने वाले यह तूफान कृषि के लिए भी अच्छा बताया जाता है।

तेज गति से चलने वाले स्थानीय तूफान
वैसे काल बैसाखी से तात्पर्य तेज गति से चलने वाले स्थानीय तूफ़ानों से है।
इस प्रकार के तूफ़ान साधारणत बंगाल, उड़ीसा, बिहार, झारखंड और असम में आते हैं। गर्म व शुष्क स्थानीय हवाएं और आद्र्र समुद्री हवाएं इसका कारण हैं। इन हवाओं के मिलन के कारण मूसलाधार वर्षा होती है।तेज़ मूसलाधार वर्षा के साथ-साथ तीव्र गति के तूफ़ान भी आते हैं। इन तूफ़ानों को ही काल बैसाखी कहा जाता है।।

कुछ मिनटों में ही घट जाता है तापमान
गांगेय बंगाल में आने वाली कालबैशाखी के कुछ मिनटों के भीतर ही तापमान 10 डिग्री सेल्सियस तक कम हो जाता है। कालबैशाखी के साथ होने वाली बारिश लोगों को चिपचिपी गर्मी से राहत दिलाती है। यूं तो कालबैशाखी के दौरात हवा की गति 40 से 80 किमी प्रति घंटे के बीच की होती है। लेकिन कई दफे गति 100 किमी प्रति घंटे की सीमा भी लांघ जाती है। जो बड़ी तबाही का कारण बन जाता है। कालबैशाखी की समय सीमा कुछ मिनटों से लेकर आधे पौन घंटे तक रहती है। कालबैशाखी केदौरान कुछ मिलीमीटर से लेकर 80 मिलीमीटर तक वर्षा भी होती है। कहीं कहीं ओले गिरने की भी खबरे आती हैं।

इस साल कोलकाता में मचाई तबाही
इस साल अपे्रल महीने में आई जानलेवा कालबैशाखी के कारण कोलकाता महानगर पर खासा असर पड़ा। सैकड़ों जगह पेड़ गिर गए। कोलकाता और आसपास दस से ज्यादा लोग मारे गए। वहीं जिलों में भी इस सीजन की कालबैशाखी से 15 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।