
कोलकाता में वायु और ध्वनि प्रदूषण के हालात होंगे ज्यादा खराब
कोलकाता. कोलकाता में दिनोंदिन वायु और ध्वनि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। कुछ ही दिनों में हालात और खराब हो जाएंगे। शहर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सबुज मंच नामक संस्था ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चिट्ठी लिखी है। मंच ने कहा कि प्रदूषण को लेकर सरकार आवश्यक कदम उठाए। कोलकाता में भी अब हर दिन प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। पर्यावरणविदों का मानना है कि आने वाले सप्ताह में वायु और ध्वनि प्रदूषण के सबसे खराब स्तर पर पहुंचने की संभावना है। अनुमान है कि लोग नए साल का जश्न मनाएंगे, जिसमें खूब पटाखे छोड़े जाएंगे।
पटाखे फोड़ने का चलन बढ़ा: शहर में वरिष्ठ नागरिकों के ग्रुप ने सबुज मंच नाम के एक संगठन के माध्यम से मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर आग्रह किया है कि वे शहर में तेज आवाज वाले पटाखों के फोड़ने के खतरे को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दें। पिछले कुछ वर्षों से नए साल की पटाखे फोडऩे का चलन बढ़ गया है। सबुज मंच ने पत्र में आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन ने अदालत की ओर से तय डेसिबल स्तर को लागू नहीं किया है। जिस कारण वरिष्ठ नागरिकों के साथ-साथ हृदय संबंधी बीमारियों वाले लोगों के लिए जबरदस्त समस्याएं पैदा कर रहा है।
लोगों को काफी परेशानी होती
शहर में वायु और ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे पर साल भर से लंबी लड़ाई लड़ रहे पर्यावरणविद और ग्रीन टेक्नोलॉजिस्ट सोमेंद्र मोहन घोष ने बताया कि पटाखे फोडऩे की समस्या के अलावा बीते कुछ सालों के दौरान कुछ अतिरिक्त परेशानी का भी सामना करना पड़ा रहा है। उनका कहना है कि साल के इस समय के दौरान डीजे और साउंडबॉक्स का उपयोग करते हुए विभिन्न बहु-मंजिला इमारतों में छत पर पार्टियां होती हैं। ये पार्टियां देर रात तक और कभी-कभी सुबह तक चलती रहती हैं, जिससे वजह से आस पास के रहने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है।
नाइट क्लबों से ध्वनि प्रदूषण
उनका कहना है कि क्रिसमस की पूर्व संध्या से लेकर के पहली जनवरी के अंत तक विभिन्न क्लब और एसोसिएशन ओपन-एयर म्यूजिक कॉन्सर्ट आयोजित करते हैं। आधी रात तक ये कॉन्सर्ट चलते हैं। उनका कहना है कि रात 10 बजे तक के लिए समय सीमा तय की गई है लेकिन उसका कोई पालन नहीं करता है। घोष ने दावा किया कि पुलिस प्रशासन भी कोई कार्रवाई नहीं करता है।
जानवरों पर भी करेगा असर
घोष ने कहा कि चिडिय़ाघर परिसर में भारी भीड़ के कारण प्रदूषण बढ़ा जिससे वहां रहने वाले जानवरों को भी असुविधा हो रही है। इसलिए इससे सबक लेते हुए अधिकारियों को प्रदूषण नियंत्रण में रखने के लिए उचित उपाय करने चाहिए। इंसानों के साथ जानवरों पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है।
Published on:
29 Dec 2022 06:55 pm
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