
दलदली मिट्टी और पानी की धाराओं में छिपे हुए यहां के मगरमच्छ मौका पाते ही इंसानों को भी अपना शिकार बनाने से नहीं चूकते।
सुंदरवन. हजारों मीलों में फैले सुंदरवन के जंगलों में खतरे का पर्याय सिर्फ रॉयल बंगाल टाइगर ही नहीं है, बल्कि यहां मौजूद असंख्य धाराओं की दलदली मिट्टी में छिपा बैठा मगरमच्छ जैसा खतरनाक शिकारी भी है। जो पलक झपकते ही अपने शिकार को मजबूत जबड़ों में जकड़ लेता है। शहद, केकड़े, मछलियां व अन्य वनोपज संग्रह करने के लिए सुंदरवन जाने वाले स्थानीय लोग सरीसृप की इस विशाल प्रजाति से भी भय पाते हैं। दलदली मिट्टी और पानी की धाराओं में छिपे हुए यहां के मगरमच्छ मौका पाते ही इंसानों को भी अपना शिकार बनाने से नहीं चूकते।
गोसाबा, पाथरप्रतिमा और नामखाना में ज्यादा हमले
एक शोध के मुताबिक वर्ष 200 से 2013 के बीच सुंदरवन में मगरमच्छों के इंसानों पर हमले के सौ से ज्यादा मामले सामने आए हैं। अमूमन मगरमच्छ दिन में शिकार करता है। सुंदरवन के गोसाबा, पाथरप्रतिमा और नामखाना इलाकों में मगरमच्छ के हमलों के ज्यादा मामले सामने आते हैं।
अनुकूल वातावरण है मगरमच्छों के लिए
समय समय पर हुए शोधों के मुताबिक सुुंदरवन के जंगल और डेल्टा में बहने वाली असंख्य जल धाराओं की सेलिनिटी (खारापन) इस तगड़े शिकारी के मनमाफिक है। सतह जल का तापमान भी उनके प्रजनन का अनुकूल वातावरण तैयार करता है। जलीय जंतुओं की बहुतायत, मछलियों की उपलब्धता और हिरण जैसे बड़े जानवरों की मौजूदगी उनके आहार तंत्र की व्यवस्था सुनिश्चित कर देती है।
15 फुट का उभयचारी दानव है
सुंदरवन में पाए जाने वाले मगरमच्छ की लंबाई 15 फुट तक होती है। मादाएं भी 12 फुट तक की होती हैं। यह खतरनाक शिकारी आठ से 12 मील प्रति घंटा की रफ्तार से तैर सकता है और अपने इलाके में किसी भी दूसरे जानवर को बर्दाश्त नहीं करता है। यदा कदा बड़े मगरमच्छ के जबड़ों में फंसकर रॉयल बंगाल टाइगर के मारे जाने की खबरें भी आती हैं।
Published on:
13 May 2018 06:59 pm
बड़ी खबरें
View Allकोलकाता
पश्चिम बंगाल
ट्रेंडिंग
