
...तो हो जाती आमरी अस्पताल अग्निकांड की पुनरावृत्ति
बिल्डिंग के ऊपर तल्ल स्थित आईसीसीयू, कार्डियोलॉजी, मेडिसिन, हेमेटोलॉजी समेत विभिन्न विभागों में लगभग 250मरीज भर्ती थे। उनमें से अधिकांश मरीज स्वयं भाग निकलने के लायक नहीं थे। धुआं से कई का दम घुट जाता।चंूकि सुबह का समय था। मरीज जगे हुए थे। अस्पताल में मरीज के परिजनों की भीड़ थी। लोगों ने धुएं को देख लिया। तत्काल प्रभाव से मरीजों को बाहर निकाल लिया गया। आगर आग रात में लगी होती तो कई मरीजों की जान चली जाती। बिल्डिंग के ऊपर तल्ल स्थित आईसीसीयू, कार्डियोलॉजी, मेडिसिन, हेमेटोलॉजी समेत विभिन्न विभागों में लगभग 250मरीज भर्ती थे। उनमें से अधिकांश मरीज स्वयं भाग निकलने के लायक नहीं थे। 9 दिसम्बर 2011 की रात दक्षिण कोलकाता के ढाकुरिया इलाका स्थित आमरी अस्पताल में आग लगी थी।
कोलकाता
कलकत्ता मेडिकल कॉलेज अस्पताल की एमसीएच बिल्डिंग में आग सुबह लगी, यह राहत की बात रही। अगर आग रात में लगती तो शायद वर्ष 2011 में 92 मरीजों को मौत की नींद सुला देने वाले आमरी अस्पताल अग्रिकाण्ड की पुनरावृत्ति हो जाती। चंूकि सुबह का समय था। मरीज जगे हुए थे। अस्पताल में मरीज के परिजनों की भीड़ थी। लोगों ने धुएं को देख लिया। तत्काल प्रभाव से मरीजों को बाहर निकाल लिया गया। आगर आग रात में लगी होती तो कई मरीजों की जान चली जाती। बिल्डिंग के ऊपर तल्ल स्थित आईसीसीयू, कार्डियोलॉजी, मेडिसिन, हेमेटोलॉजी समेत विभिन्न विभागों में लगभग 250मरीज भर्ती थे। उनमें से अधिकांश मरीज स्वयं भाग निकलने के लायक नहीं थे। धुआं से कई का दम घुट जाता।
----क्या हुआ था आमरी अस्पताल अग्रिकाण्ड में
9 दिसम्बर 2011 की रात दक्षिण कोलकाता के ढाकुरिया इलाका स्थित आमरी अस्पताल में आग लगी थी। वातानूकुलित अस्पताल में धुआं भर गया था। धुआं से दम घुटकर 92 मरीजों की मौत हो गई है। घटना के बाद अस्पताल को बंद कर दिया गया था। लगभग दो साल बाद नवम्बर 2013 में दुबारा अस्पताल खुला।
Published on:
03 Oct 2018 11:00 pm
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