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ऑटो रिक्शा चालकों की मनमानी

कोलकाता प्रसंगवश

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kolkata west bengal

ऑटो रिक्शा चालकों की मनमानी

महानगर के जादवपुर ८बी बस ठहराव के पास हाल ही में एक ऑटो रिक्शा चालक ने एक महिला को थप्पड़ जड़ दिया, महिला का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने ऑटो चालक से पूछ दिया कि आप गांगुली बागान क्यों नहीं जाएंगे? अफसोस की बात यह है कि ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने इस मामले में कोई मदद नहीं, आखिरकार महिला पुलिस थाने गई, थाने में आरोपी ऑटो चालक के खिलाफ महिला ने शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी ऑटो चालक को गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले भी महानगर में यात्रियों से ऑटो चालकों की बदसलूकी की घटनाएं सामने आई हैं। कोलकाता, हावड़ा, हुगली, बैरकपुर इलाके में ऑटो रिक्शा चालकों की मनमानी की कहानी लम्बी होती जा रही है। जहां-तहां से सवारी लेना, मनमाना किराया वसूलना, गंतव्य तक नहीं जाना, यात्रियों से बदसलूकी, यात्रियों से भिड़ जाना, थप्पड़ जड़ देना आदि ऑटो वालों की करतूतों से महानगर के लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। चालक इतनी लापरवाही से ऑटो चलाते हैं कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। अब सवाल है कि महानगरवासी कब तक ऑटो वालों का जुल्म बर्दाश्त करेंगे? क्या किसी सभ्य समाज में इस तरह की घटनाएं बर्दाश्त की जानी चाहिए?
महानगर के कई इलाकों में लोग ऑटो वालों के जुल्म से परेशान हैं। उल्टाडांगा से साल्टलेक तथा सेक्टर ५ में आवागमन करने वाले लोग इन दिनों ज्यादा परेशान हैं। खासकर मनाना किराये को लेकर। जब कोई यात्री ऑटो में सवार होता है तथा पूछता है कि उल्टाडांगा से करुणामयी तक किराया कितना है? ऑटो चालक साफ बोलता है कि ५० रुपए। अगर ५० रुपए देना है तो चलो वरना उतर जाओ। जबकि उचित किराया १४ रुपए है। ऐसे में लोगों को परेशान होना स्वाभाविक है। दूसरी तरफ पुलिस जब भी ऑटों चालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई करती है ऑटे वाले विरोध प्रदर्शन करने लगते हैं। जुर्माना भरने से भी कतराते हैं।
ऐसे में इन सब घटनाओं के म²ेनजर राज्य सरकार खासकर परिवहन विभाग को इस मामले में ठोस कदम उठाने की जरूरत है। परिवहन विभाग को विभिन्न रूटों पर चलने वाले ऑटों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करनी चाहिए। जो भी समस्याएं सामने आ रही हैं, उनका निदान करना चाहिए। सबसे पहले परिवहन विभाग को एक पारदर्शी ऑटो नीति की घोषणा करनी चाहिए। अभी तक यह साफ नहीं है कि उल्टाडांगा और साल्टलेक इलाके में कितने ऑटो चलते हैं। पूछने पर पुलिस का जवाब है कि तीन हजार, जबकि ऑटो यूनियन का कहना है कि चार हजार, दूसरी तरफ स्थानीय पार्षद का दावा है कि करीब ५ हजार ऑटे चलते हैं। ऐसे में परिवहन विभाग को यह पता लगाना चाहिए कि किस रूट पर कितने ऑटो चल रहे हैं। सभी के साथ मिल बैठकर ऐसा रास्ता निकालना चाहिए कि किसी को परेशानी न हो। जैसे सबसे ऑटो स्टैंड, रूट तथा फिर किराया तय करना चाहिए। हर ऑटो में किराये की सूची होनी चाहिए। इसके बावजूद भी कोई ऑटो चालक जहां तहां ऑटो खड़ा करता है तहां मनामाना किराया वसूलता है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वरना इसी तरह लोग परेशान होते रहेंगे।