
मिजोरम में 53 और लक्षद्वीप में सिर्फ 2 , भारत में भिखारियों की संख्या 4 लाख से अधिक, पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों की स्थिति बेहतर
कोलकाता/नई दिल्ली. केंद्रीय सामाजिक कल्याण मंत्रालय ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में भारत में भिखारियों की संख्या के बारे में जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार देश में इस वक्त कुल 4,13,760 भिखारी हैं, जिनमें 2,21,673 भिखारी पुरुष और बाकी महिलाएं हैं। भिखारियों की इस लिस्ट में भारत में टॉप पर पश्चिम बंगाल है। देशभर में प. बंगाल में भिखारियों की संख्या सबसे अधिक है और उसके बाद दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश और तीसरे नंबर पर बिहार का सस्थान है। सामाजिक कल्याण मंत्री थवारचंद गहलोत ने संसद में पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में मंगलवार को लोकसभा में देश में भिखारियों की संख्या के आकड़े पेश किए। यह सभी आंकड़े 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार किए गए हैं। गहलोत ने संसद में पूछे गए सवालों के लिखित जवाब में देश भर में भीख मांगने वाले भिखारियों की संख्या का डाटा जारी किया। इन आंकड़ों के मुताबिक इस सर्वे में यह पाया गया कि 81,224 भिखारियों की संख्या के साथ पश्चिम बंगाल का देश में पहला स्थान है। वहीं दूसरे स्थान पर यूपी है जहां 65,835 लोग अपनी जीविका चलाने के लिए भीख मांगने का सहारा लेते हैं। अन्य राज्यों में आंध्र प्रदेश में 65,835, बिहार में 29,723, मध्यप्रदेश में 28,695 और राजस्थान में 25,853 भिखारी पाए गए। भिखारियों की संख्या के मामलों में देश के पूर्वोत्तर राज्यों की स्थित काफी बेहतर है। रिपोर्ट के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश में सिर्फ 114 भिखारी, नागालैंड में 124 और मिजोरम में सिर्फ 53 भिखारी हैं। वहीं देश के दो बड़े पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड में 3,320 भिखारी और हिमाचल प्रदेश में 809 भिखारी भीख मांग रहे हैं।
संघ शासित प्रदेशों में दिल्ली का स्थान पहला
गौरतलब है कि संघ शासित प्रदेश में भिखारियों की संख्या में दमन और दीव में 22, दिल्ली में 2,187, चंडीगढ़ में 121 और लक्षद्वीप में सिर्फ 2 ही भिखारी भीख मांग रहे हैं।
Published on:
22 Mar 2018 12:18 pm
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