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बंगाल की स्वास्थ्य सेवा की स्थिति लचर: हर्षवर्धन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य सेवा की स्थिति को लचर करार दिया। उन्होंने कहा कि 2015 से 2020 के आंकड़ों पर गौर करें तो बंगाल में जहां शिशु मृत्युदर में 20 फीसदी की कमी आई, जबकि पड़ोस के राज्यों में इसमें 27 से 28 फीसदी तक की कमी आई है।

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बंगाल की स्वास्थ्य सेवा की स्थिति लचर: हर्षवर्धन

बंगाल की स्वास्थ्य सेवा की स्थिति लचर: हर्षवर्धन

राज्य में शिशु मृत्युदर में 20 फीसदी तो पड़ोसी राज्यों में 28 फीसदी की कमी
कोलकाता. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य सेवा की स्थिति को लचर करार दिया। उन्होंने कहा कि 2015 से 2020 के आंकड़ों पर गौर करें तो बंगाल में जहां शिशु मृत्युदर में 20 फीसदी की कमी आई, जबकि पड़ोस के राज्यों में इसमें 27 से 28 फीसदी तक की कमी आई है। इससे पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवा की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की अनदेखी के कारण पश्चिम बंगाल के लोग आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, जबकि योजना में पोर्टबिलिटी की सुविधा के कारण अंडमान निकोबार, बिहार, झारखंड और त्रिपुरा के लोग पश्चिम बंगाल में आकर अपना इलाज करा रहे हैं। बंगाल दौरे के क्रम में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यहां की सरकार अपने राजनीतिक फायदे के लिए किस तरह जनता के हितों की अनदेखी कर सकती है, इसका एक ज्वलंत उदाहरण आयुष्मान भारत योजना है।
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राज्य में परिवर्तन अपरिहार्य
हर्षवर्धन ने कहा कि बंगाल में सरकार का बदलाव अपरिहार्य है और राज्य में भाजपा की रथ यात्रा इस प्रक्रिया को मजबूती दे सकती है। किसी का नाम लिये बगैर उन्होंने कहा कि राज्य के लोग भाई-भतीजावाद, बढ़ते भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण से आजिज आ चुके हैं। हर्षवर्धन ने यहां संवाददाताओं से कहा कि मुझे बीते एक साल से विभिन्न स्रोतों से जो जानकारी मिल रही है उससे संकेत मिलता है कि राज्य में बदलाव अपरिहार्य है। उन्होंने कहा कि अब राज्य में और कुछ नहीं सिर्फ भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण और भाई-भतीजावाद है। यह आम लोग कह रहे हैं जिनका भाजपा के साथ किसी तरह का जुड़ाव नहीं है।
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सात और टीके विकसित कर रहा भारत: हर्षवर्धन
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने शनिवार को कहा कि देश कोविड-19 के सात और नए टीके विकसित कर रहा है और देश के सभी लोगों को टीका लगाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि टीके को खुले बाजार में उतारने की केन्द्र सरकार की फिलहाल कोई योजना नहीं है और इसका फैसला परिस्थिति के अनुसार किया जाएगा। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि 50 साल से ज्यादा आयु के लोगों को कोविड-19 का टीका लगाने का काम मार्च से शुरू होगा। उन्होंने कहा, ''हम सिर्फ दो टीकों पर निर्भर नहीं है क्योंकि देश सात और स्वदेशी टीके विकसित करने पर काम कर रहा है। साथ ही हम और टीके विकसित करने पर भी काम कर रहे हैं क्योंकि भारत विशाल देश है और सभी तक पहुंचने के लिए हमें और लोगों और अनुसंधान की जरूरत है। केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि सात नए टीकों में से तीन टीके परीक्षण के चरण में, दो टीके प्री-क्लिनिकल चरण में, एक फेज-1 और एक अन्य फेज-2 के परीक्षण के चरण में है। उन्होंने कहा कि फिलहाल कोविड-19 का टीका आपात स्थिति के आधार पर लगाया जा रहा है और पूरी निगरानी तथा नियंत्रित तरीके से टीकाकरण किया जा रहा है। अगर टीके को खुले बाजार में उतार दिया जाए तो उनपर कोई नियंत्रण नहीं रह जाएगा। स्थिति के आधार पर फैसला लिया जाएगा।