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कविगुरु की कविताओं के बीच सजेंगी मां दुर्गा

उत्तर कोलकाता में अपनी अलग पहचान रखने वाले चलताबागान सार्वजनिन दुर्र्गोत्सव में इस बार कविगुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविता की पंक्तियों के बीच मां दुर्गा विराजेंगी।

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कविगुरु की कविताओं के बीच सजेंगी मां दुर्गा

उत्तर कोलकाता में अपनी अलग पहचान रखने वाले चलताबागान सार्वजनिन दुर्र्गोत्सव में इस बार कविगुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविता की पंक्तियों के बीच मां दुर्गा विराजेंगी। एक ओर संसार की रचयिता मां दुर्गा व दूसरी ओर काव्य के सृजनकर्ता कवि का अद्भुत संयोग पंडाल में दिखेगा पूरे पंडाल को २ तल्ले के छतरीनुमा घर का रूप दिया गया है। जिसकी छत पुआल से बनी हुई दर्शाई गई है। पंडाल हरे रंग से सजाया गया। जिस पर बने चित्रों में बच्चे खेल रहे हैं। कहीं मां ने बच्चे को गोद में ले रखा है तो कहीं ऐसा लग रहा है मानो धरती का जीवंत चित्रण हो गया हो। संकरे रास्ते पर बने पंडाल में अद्भुत कलाकारी बखूबी प्रदर्शित की गई है।

एकतारे की धुन से सजेंगी काव्य पंक्तियां

चलताबागान सार्वजनिन में बंगाल लोक संस्कृति को उतारने की कोशिश की गई है। पूरे मंडप को एकतारे से सजाया गया है। झोपड़ीनुमा पंडाल में जगह जगह बाउल एकतारा बजाकर गीत गा रहे हैं। इस धुनों पर काव्य संगीत बनेगा। शांतिनिकेतन का दृश्य भी पंडाल में दिखेगा।

३ महीने से तैयार हो रहा पंडाल
चलताबागान सर्वाजनिन के पूजा पंडाल की तैयारी लगभग ३ महीने से चल रही। पंडाल में खास रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पंडाल का अधिकांश हिस्सा चित्रकारी से जुड़ा हुआ है।

रोशनी के साथ सुन्दर थीम का तालमेल

लताबागान सार्वजनिन दुर्र्गोत्सव में देश के उत्तरी पूर्वी क्षेत्रों में पाए जाने वाले गोलाकर छत के झोपड़ी नुमा इस झोपड़ी नुमा इस पंडाल को रोशनी की सजावट के साथ सुंदर रूप दिया जा रहा है। आस पास क ी इमारतों पर गोलाकार आकृति में बिजली की सजावट की गई है रोशनी की सजावट के साथ सुंदर रूप दिया जा रहा है। मानो धरती का जीवंत चित्रण हो गया हो। संकरे रास्ते पर बने पंडाल में अद्भुत कलाकारी बखूबी प्रदर्शित की गई है।