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गेरुआ पर मुख्यमंत्री ममता का व्यंग्य

कहा, सब पर नहीं शोभता गेरुआ-नाम नहीं लेते हुए भाजपा व आरएसएस पर किया कटाक्ष

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mamata

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को गेरुआ पर व्यंग्य करते हुए कहा कि गेरुआ सब पर नहीं शोभता है। गेरुआधारी बाउल कलाकार सम्मान पाने के हकदार हैं, क्योंकि ये सर्वधर्म समन्वय की बात करते हैं।
नाम नहीं लेते हुए भाजपा व आरएसएस पर कटाक्षममता ने भाजपा व आरएसएस के नाम नहीं लेते हुए कटाक्ष किया कि जो गेरुआ का गलत इस्तेमाल करते हैं उनको बाउल कलाकारों से सीखना चाहिए। वे गुरुवार को बीरभूम जिले के केंदुली जयदेव मेले के उद्घाटन के मौके पर बोल रही थीं। इस मेले में एक हजार बाउल कलाकार उपस्थित थे। राज्य के विभिन्न जिलों से 10-10 बाउल कलाकारों को सम्मान देने के लिए बुलाया गया था। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को भाजपा पर परोक्ष रूप से हमला करते हुए कहा कि जो लोग देश में दंगा फैलाते हैं उनकी पोशाक गेरुआ नहीं होती। सब पर गेरुआ मेल भी नहीं खाता है। हालांकि गेरुआधारी बाउल कलाकार सम्मान के पात्र हैं।

सर्वधर्म समन्वय पर विश्वास
ममता ने कहा कि बंगाली हमेशा सर्वधर्म समन्वय पर विश्वास करते हैं। सभी धर्म के लोगों को एक साथ लेकर चलने पर विश्वास करते हैं। लेकिन जो धर्म को लेकर राजनीति करते हैं वे उनके खिलाफ जरूर अपनी आवाज उठाएंगी।

केंद्र पर टिप्पणी

ममता ने केंद्र पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे इस बार गणतंत्र दिवस समारोह में पश्चिम बंगाल की ओर से सभी कलाकारों को लेकर एक टैब्लो बनाया गया था। लेकिन केंद्र ने इसे स्वीकार नहीं किया।

क्या करते हैं बाउल कलाकार
बाउल कलाकार इस गांव से उस गांव घूम-घूमकर आध्यात्मिक लोक गीत गाते हैं। वे आध्यात्मिक गीत गाने के दौरान गेरुआ धारण करते हैं। एकतारा उनके विशेष वाद्ययंत्र हैं। राज्य में लगभग दो लाख बाउल कलाकार हैं। राज्य सरकार इनको बढ़ावा देने का काम कर रही है। मुख्यमंत्री का दावा है कि वे इन कलाकारों का राज्य सरकार के विज्ञापनों में भी इस्तेमाल करती हैं।