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तालाब में डूबा बच्चा तो परिजनों ने पीटा पानी…पर क्यों?

- दक्षिण 24 परगना जिले के जीवनतल्ला थाना इलाके में बच्चे के पानी में डूबने पर उसके परिजनों ने तालाब को खूब पीटा। यही नहीं तालाब के सामने आग जलाकर ओझा से झाड़-फूंक भी कराया। लेकिन इन सबका कोई फायदा नहीं हुआ। बल्कि, उनके अंधविश्वास की बलि 4 साल का एक मासूम चढ़ गया।

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तालाब में डूबा बच्चा तो परिजनों ने पीटा पानी...पर क्यों ?

तालाब में डूबा बच्चा तो परिजनों ने पीटा पानी...पर क्यों ?

कोलकाता. पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में 4 साल का एक मासूम अंधविश्वास की बलि चढ़ गया ।जीवनतल्ला थाना क्षेत्र के पीतखाली गांव के तालाब में डूबे बच्चे का इलाज की बजाय ओझा से झाड़ फूंक कराया। बाद में अस्पताल ले जाने पर उसकी मौत हो गई। जीवनतल्ला थाने की पुलिस फरार आरोपी ओझा की तलाश में जुट गई है। सूत्रों के मुताबिक शनिवार सुबह चार साल का बच्चा घर के बाहर खेलते-खेलते तालाब में गिर गया। काफी देर बाद जब उसके परिजनों को पता चला तो स्थानीय लोगों की मदद से उसे बाहर निकाला। पेट में पानी भर जाने की वजह से वह बुरी तरह अस्वस्थ हो गया।

परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाने की बजाय इलाज के लिए एक ओझा को बुलाया। ओझा ने तालाब किनारे आग जलाई और तंत्र साधना शुरू कर दी। बच्चे को पानी में डूबोकर रखते हुए तालाब को बांस से पीटने को कहा। परिजन ओझा के कहने पर लगभग डेढ़ घंटे ऐसा करते रहे। तंत्र साधना के जरिए बच्चे का इलाज देखने लोगों की भीड़ तालाब के पास जुट गई। भीड़ में प्राथमिक चिकित्सा केंद्र के एक डॉक्टर भी थे। इस तरह से इलाज देखकर उन्होंने ओझा के चंगुल से बच्चे छुड़ाया और कैनिंग अस्पताल ले गए तब तक काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार समय रहते अस्पताल लाने से बच्चे की जान बच सकती थी।

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- पहले भी चलाया अभियान :

इससे पहले 2017 में जिले के बासंती इलाके में ठीक इसी तरह की घटना में 2 साल की एक बच्ची की मौत हो गई थी। उसके बाद जिला प्रशासन की ओर से जागरूकता अभियान चलाया गया था। इसके बावजूद लोगों की आंखों पर अंधविश्वास की बंधी काली पट्टी खुल नहीं रही है।