
Search for life on Mars: मंगल ग्रह में महासागर की फिर से खोज में सफलता का दावा
वैज्ञानिकों के शोध टीम में बंगाल के दो वैज्ञानिक भी
मेरिन एण्ड पेट्रोलियम जियोलॉजिकल पत्रिका में शोधपत्र प्रकाशित
कोलकाता.
पूर्व में कुछ वैज्ञानिकों ने लाल ग्रह के नाम से जाने जाने वाले मंगल ग्रह में मरूस्थल और नदी के साथ ही सागर या महासागर के भी होने की संभावनाएं जगाई थी। लेकिन प्रमाण के अभाव में उक्त तथ्य खारिज हो गया था। एक बार फिर चार वैज्ञानिकों ने मंगल में महासागर होने की संभावना जगाया है। इनमें दो वैज्ञानिक बंगाल के हैं। विश्व स्तरीय मेरिन एण्ड पेट्रोलियम जियोलॉजिकल पत्रिका में इनका शोधपत्र प्रकाशित हुआ है, जिसकी वैज्ञानिक प्रशंसा कर रहे हैं। लेकिन वैज्ञानिक मंगल पर महासमुद्र होने का क्यों पता लगाना चाहते हैं।
शोधकर्ताओं की टीम में भू-वैज्ञानिक रजत मजूमदार और उनकी बेटी सृजनी मजूमदार, दोनों बंगाल के हैं। रजत मजूमदार जर्मन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी इन ओमन में भू-विज्ञान के अध्यापक है और उनकी बेटी सजनी कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया में रीडर हैं। टीम के प्रमुख भूमिका में कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ अलबाटा के वैज्ञानिक अक्टोवियन कैट्यूनियन है और दक्षिण अफ्रीका के यूनिवर्सिटी ऑफ प्रिटोरिया के वैज्ञानिक पैट्रिक भी टीम के सदस्य हैं।
लगभग डेढ़ वर्ष में लिखा गए शोध पत्र में दावा किया गया है कि मंगल के जेजेरो के गहवर के करीब जो ब-द्वीप भूमि रूप है, उसका ज्वार-भाटा से संबंध है। मंगल के उत्तर मेरू के पास महासागर होने के कारण ही ज्वार-भाटा होता था, जिसके कारण ही ब-द्वीप का निर्माण हुआ था।
वैज्ञानिकों का ये है दावा
शोधपत्र में रजत मजूमदार ने कहा है कि अमेरिका के महाकाश शोध संस्था नासा के पर्सिवरेंस रोवर की ओर से खीची गई तस्वीर के विश्लेषण से मंगल ग्रह पर महासमुद्र होने की संभावना जगी है। मंगल के उत्तर मेरू के निकट समुद्र होने की बात पहले ही उठी थी। इसके अलावा वैज्ञानिकों का एक बड़े वर्ग का मत था कि मंगल के उपग्रह आकार के अनेक हवायय तार के आकर्षण से ज्वार-भाटा होने की संभावना नहीं है। इस लिए उस क्षेत्र में सागर के बदले कुछ और था। लेकिन जेजेरो के निकट नासा के रोवर के रडार पर जो देखा गया है उसकी प्रक्रिया के विश्लेषण कर रजत मजूमदार और टीम के वैज्ञानिकों ने अलग तर्क पेश किया है।
टीम के वैज्ञानिकों का तर्क है कि ज्वार-भाटा नहीं होने पर वहां उस तरह बालू के अंश नहीं होता। हमने मंगल के उक्त क्षेत्र में देखे गए भूमि रूप के महासागर से संबंध होने का पता लगा लिया है। उक्त तथ्यों के विश्लेषण कर हमे लगता है कि करोड़ों वर्ष पहले मंगल के जेजेरो बेसिन से समुद्र का संबंध था। वैज्ञानिक का मानना है कि उक्त क्षेत्र के भूमि रूप की ओर समुद्रिक चरित्र था।
तथ्य को और प्रमाणित करने की जरूरत
रजत मजूमदार ने कहा है कि अनेक वैज्ञानिकों ने यह विश्वस दिला है कि मंगल ग्रह पर समुद्र नहीं हो सकता है। नतीजा कोई भी मंगल पर समुद्र के होने के तर्क को मानने और समझने को तैयार नहीं है। लेकिन हमारे शधपत्र प्रकाशित होने के बाद बहुत से वैज्ञानिक हमारी प्रशंसा कर रहे हैं। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। इस तथ्य को और प्रमाणित करना होगा। इसे प्रमाणित करने के लिए नासा की ओर से जेजेरो से लाए गए पत्थरों का विश्लेषण करने की जरूरत है।
इस लिए की जा रही है समुद्र के होने की खोज
वैज्ञानिक रजत मजूदार ने कहा कि समुद्र का संबंध जीवन से जुड़ा है। इस लिए मंगल पर समुद्र के अस्तित्व होने का पता लगने पर पता लग सकता है कि उक्त लाल ग्रह पर जीवन था या नहीं।
Published on:
17 Nov 2023 05:02 pm
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