
‘सच्ची गोसेवा के लिए निस्वार्थ समर्पण जरूरी’
हावड़ा. भागवत के अनुसार जब कलयुग ने गाय को मारने के लिए उस पर प्रहार किया तो राजा परीक्षित के लिए असहनीय हो गया और उन्होंने कलयुग को दण्ड देने के लिए अपना शस्त्र उठा लिया, जिससे भयभीत कलयुग अपने इस कृत्य के लिए क्षमा-याचना करते हुए राजा के चरणों में गिर पड़ा। आज इस कलियुग में ठीक वैसा ही हो रहा है। गोमाताओं का सरेआम कत्ल हो रहा है, उनके बछड़ों को मारकर उनका मांस बेचे जाने की खबरें आए दिन सुनने को मिलती है लेकिन इस पर अंकुश नहीं लग रहा जिसकी मुख्य वजह उदासीनता है। भागवत मर्मज्ञ गोभक्त पं. मालीराम शास्त्री ने शुक्रवार को बंगेश्वर महादेव मंदिर में यह बात कही। असहाय वृद्धों व गोमाताओं की सेवार्थ भागवत जन-कल्याण ट्रस्ट की ओर से राजारहाट के पाथेरघाटा में संस्थापित ‘ममता का मंदिर’ व गोशाला संचालन के लिए दिनेश-लक्ष्मी, संजय-मीनू अग्रवाल के मुख्य यजमानत्व, सत्यनारायण खेतान (मामाजी), सुभाष अग्रवाल के संरक्षकत्व में आयोजित भागवत महापुराण यज्ञ के दूसरे दिन की कथा सुनाते हुए शास्त्री ने कहा कि पहले के राजा अपने प्राणों की बाजी लगाकर भी गोमाता की रक्षा करते थे। अगर वर्तमान सरकारें गोमाता की सुरक्षार्थ ईमानदारी से अपना कत्र्तव्य निभाएं तो निश्चित ही गोहत्या पर पाबंदी लग सकती है। गोसेवा और रक्षा के नाम पर हो रही राजनीति पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि अगर हम वास्तव में गोरक्षा और गोसेवा करना चाहते हैं तो हमें नि:स्वार्थ भाव व सर्वस्व बलिदान को तैयार रहना होगा। शास्त्री ने भागवत कथा प्रारम्भ करने से पूर्व ‘ममता का मंदिर’ में स्थित गोपाल गोशाला में विधिवत पूजा-अर्चना किया। कथा प्रसंग के अनुसार उन्होंने सती अन्सुईया कथा पर प्रवचन करते हुए कहा कि महिला के लिए पतिव्रता होना ही सबसे बड़ा धर्म है। इस अवसर पर शिव-पार्वती विवाह की झांकी प्रस्तुत की गई। शिव विवाह के दौरान सुमधुर भजनों पर उपस्थित श्रद्धालु झूम उठे। प्रचार प्रभारी सुरेश कुमार भुवालका ने बताया कि तीसरे दिन 17 नवम्बर को शास्त्री जड़ भरत, अजामिल व प्रहलाद चरित्र पर प्रवचन करेंगे। यह आयोजन 21 नवम्बर तक प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक चलेगा।
Published on:
16 Nov 2018 10:36 pm
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