
चक्रवाती तूफानों की विभीषिका से भी नहीं डिगा रॉयल बंगाल टाइगर
बाघों की गणना के राज्यव्यापी नतीजों में संख्या रही यथावत
अब राष्ट्रीय गणना के नतीजों का इंतजार
कोलकाता. भारतीय महाद्वीप का सबसे खतरनाक शिकारी माने जाने वाला रॉयल बंगाल टाइगर का कुनबा सुंदरवन के अपने प्राकृतिक आवास में फल फूल रहा है। नदियों, मैंग्रोव की झाडिय़ों से अपने इलाके में आने वाले हर मछुआरे, वनोपज लेने वालों पर पैनी नजर रखने वाला और अक्सर उनपर हमला कर अपनी धमक जाहिर करने वाला यह विशालकाय शिकारी इलाके में प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद अपना कुनबा बढ़ा रहा है। वर्ष 2020 में आए चक्रवाती तूफान अम्फान और वर्ष 2021 में आए यास के बावजूद सुंदरवन का यह शिकारी अपनी संख्या बचाए रखने में कामयाब रहा है। अब इसी महीने राष्ट्रीय गणना के नतीजों के आने की घोषणा के बाद उसकी संख्या में बढ़ोतरी की उम्मीद भी जताई जा रही है।
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गत दो सालों में संख्या रही 96
पश्चिम बंगाल के सुंदरवन में बाघों की गणना के दौरान वर्ष 2019-20 और 2020-21 में उनकी संख्या 96 पर टिकी रही। वर्ष 2020-21 की गणना में बाघों की वृद्धि नहीं होने के बावजूद वन विभाग उत्साहित था क्योंकि दो साल के दौरान आए प्रलंयकारी चक्रवाती तूफानों का सबसे ज्यादा असर इस शिकारी के प्राकृतिक आवास पर पड़ा था। इसके बावजूद उसकी संख्या में कमी नहीं आई। वहीं वर्ष 2018 की राष्ट्रीय बाघ गणना में सुंदरवन में बाघों की संख्या 88 थी।
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ऐसे हुई बाघों की राष्ट्रीय गणना
बाघों की निगरानी प्रणाली की अत्याधुनिक व्यवस्था एमएसट्रिप्स की सहायता से पहली बार सुंदरवन में बाघों की गणना की गई है। भारतीय सुंदरवन के चार हजार वर्ग किलोमीटर इलाके के अहम हिस्सों में बाघों की तस्वीरें लेने के लिए चार रेंजों के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर 1,200 कैमरे लगाए गए। दस टीमों ने सभी मौसम में नाइट विजन और सेंसर आधारित कैमरे भी लगाए गए। जिन्हें 36 दिनों बाद वापस लाकर उससे मिले डेटा को केंद्रीय सर्वर पर फीड किया। अब इसी महीने राष्ट्रीय बाघ गणना के परिणाम आने हैं। बाघ प्रेमियों और पश्चिम बंगाल के वन विभाग को उम्मीद है कि राज्य के इस दलदली और मैंग्रोव जंगल वाले सुंदरवन टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या निश्चित तौर पर बढऩे वाली है।
Published on:
06 Apr 2023 12:32 am
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