
‘पर्व भारतीय संस्कृति के सच्चे प्राण’
कोलकाता. पर्व भारतीय संस्कृति के सच्चे प्राण हैं, जो अतीत के उज्जवल भविष्य को तरोताजा करते हुए आने वाली पीढ़ी में संस्कारों का बीजारोपण करते हैं। इससे निर्मल और पवित्र भाव का जन-जन में संचार होता है बिना किसी प्रयास के। राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर महावीर सदन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए यह उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विभिन्न संस्कृति, भाषा, पहनावा, प्रांत, गरीब और अमीर होने के बावजूद भी सभी को एकता के सूत्र में पिरोकर मानवीय रिश्तों को मजबूत किया है भारतीय पर्व ने। एकता और अखंडता का दीप जलाया है और इसका सारा श्रेय आध्यात्मिक पर्व को जाता है। मुनि ने कहा कि रक्षाबंधन केवल 2 कच्चे धागों का पर्व ही नहीं, बल्कि इसके पीछे अनंत सद्भावना और असीम शक्ति का भंडार छिपा हुआ है जो सेना से भी शक्तिशाली है। इतिहास साक्षी है कि जाति और धर्म का बंधन तोड़ते हुए कैसे रानी पद्मावती के कच्चे धागों से मुस्लिम सम्राट हुमायूं ने स्वप्रेरणा से सेना लेकर रानी की सुरक्षा के लिए कूच किया था। उन्होंने कहा कि
इस पर्व को भाई-बहन तक ही सीमित न करें बल्कि धर्म, समाज और देश की रक्षा के लिए कठोर संकल्प लें। कर्तव्य के प्रति समर्पित हो निर्भीक और निडर बनकर अदम्य साहस के साथ रक्षात्मक कार्रवाई के लिए उठाया गया कठोर से कठोर कदम अहिंसा की श्रेणी में आता है। आक्रामक कार्रवाई हिंसा और रक्षात्मक अहिंसा है। जैन संत ने कहा कि पर्व को दिखावा और आडंबर से दूर रखें नहीं तो मूल स्वरूप को खोकर लक्ष्य से भटक जाएंगे, जो फिजूलखर्ची कर पर्व की पवित्रता को नष्ट कर रहे हैं। हर पर्व का क्रांतिकारी इतिहास आने वाली पीढ़ी को विरासत में दें।
----महिलाओं की सुरक्षा का संकल्प लेना होगा
उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आज आध्यात्मिक देश में कहीं पर भी बहू-बेटियां सुरक्षित नहीं हैं और बलात्कार, हिंसा, दहेज और भ्रूण हत्या के रूप में महिलाओं पर कहर ढाया जा रहा है। मुनि ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा का संकल्प देश के प्रत्येक नागरिक को लेना होगा धर्माचार्यों को पहल करनी होगी तभी पर्व की सार्थकता है, अन्यथा नहीं। मधु भंडारी, रश्मि सिंघवी, पुष्पा जैन, हेमलता मेहता, अनु काकरिया, शांता बोहरा और चंचल बच्छावत आदि महिला मंडल कार्यकर्ताओं ने रक्षाबंधन पर लोगों को राष्ट्रीय एकता का संकल्प दिलाया। कौशल मुनि ने मंगलाचरण किया और तपस्वी घनश्याम का 19 उपवास रहा।
Published on:
26 Aug 2018 10:37 pm
