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बंगाल में पहली बार २ तेंदुए को रेडियो कॉलर

- तेंदुए के व्यवहार और गतिविधियों की मिलेगी जानकारी

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कोलकाता . वन विभाग, बंगाल की ओर से दो तेंदुए को रेडियो कॉलर लगाकर जंगल में छोड़ दिया गया है ताकि उनके व्यवहार और उनके क्रिया कलापों की जानकारी मिल सके। जंगल में जानवरों के व्यवहार के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी पाने में यह रेडियो कॉलर मददगार होगा। अब तक बंगाल में हाथियों और बाघों में रेडियो कॉलर लगाया गया है। वन जंगल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, यह प्रयोग तेंदुए के लिए बहुत अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि वे ऐसे क्षेत्रों के साथ सबसे अधिक निकट रहते हैं।

उत्तर बंगाल में तेंदुए के हमलों से कम से कम 60-70 लोगों के घायल होने की रिपोर्ट मिली है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार अब तक तेंदुए की आबादी का अनुमान नहीं लगाया जा सका है।
मुख्य वन्यजीव वार्डन रवि कान्त सिन्हा ने बताया कि हमने जल्दापाड़ा नेशनल पार्क और महानंद वन्यजीव अभयारण्य के पास दो तेंदुए को पाया। हमने भारत के वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) की मदद से दोनों में रेडिया कॉलर लगाने का फैसला किया। डब्लूआईआई प्रोजेक्ट एसोसिएट दीपंजन नाहा ने बताया कि एक को जलदापाड़ा के पास दलगांव चाय बागान के करीब और दूसरे को सूकान में निजी चाय बगाना इलाके से पकड़ा गया था। रेडिया कॉलर से उनकी गतिविधियों, जंगल में तेंदुए की संख्या आदि की जानकारी मिल पाएगी। महाराष्ट्र, कर्नाटक और हिमाचल में भी तेंदुए को रेडियो कॉलर लगाया गया है।बाघों की गणना आसान

मालूम हो कि राज्य में बाघों की गणना का काम फरवरी से आरम्भ होगा। जिसके लिए हाल ही में तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर लगाया गया था। 2011-12 से बाघों की गिनती के लिए कैमरे की मदद ली गई थी। आधुनिक उपकरणों से ही बाघों की गिनती करना सहज हुआ था। उसी पद्धति को अपना कर बाघों की गिनती की जाएगी। सूत्रों के अनुसार जंगलों में कैमरे लगाए जाएंगे तो बाघों की तस्वीरें लेगी। उन तस्वीरों को कम्प्यूटर में डालकर उसका विश्लेषण करके बाघों की सही गणना होगी। इस कार्य में कुछ निजी संस्थानों की भी मदद ली जा रही है। ऐसे में दो तेंदुए पर कॉलर लगाने से काम सहज होने का अनुमान है।