
कोलकाता में दो सगी बहनों के जबरन धर्मांतरण के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने मांगी रिपोर्ट
कोलकाता
कोलकाता में हिन्दू धर्म की दो सगी बहनों का जबरन धर्मांतरण करा निकाह कराने के सनसनीखेज मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक वीरेंद्र से रिपोर्ट तलब की है। मंगलवार को राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयर पर्सन रेखा शर्मा की ओर से भेजी गई चि_ी में कहा गया है कि एक पिता ने अपनी दो बेटियों का जबरन इस्लाम में धर्मांतरण और निकाह कराने संबंधी शिकायत कोलकाता पुलिस में की है, लेकिन इस मामले में अभी तक ना तो प्राथमिकी दर्ज की गई है और ना ही आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। आयोग की चेयरपर्सन ने पुलिस महानिदेशक को इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने और इसकी रिपोर्ट भेजने को कहा है।
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पुलिस का दावा: जबरन नहीं, दोनों ने मर्जी से किया धर्मांतरण और निकाह
कोलकाता पुलिस के अधिकारियों ने मंगलवार को चुप्पी तोड़ी। पुलिस ने लड़कियों के पिता के आरोप को झूठा बाताते हुए दावा किया कि जबरन नहीं, बल्कि दोनों बहनों ने मर्जी से धर्मांतरण कर गैर सम्प्रदाय के युवकों के साथ निकाह किया था। निकाह से पहले दोनों ने कोर्ट में एफिडेविट जमा कर अपना धर्म परिवर्तन किया था। मामले में पुलिस की भूमिका पर सफाई देते हुए कोलकाता खुफिया पुलिस के संयुक्त आयुक्त (अपराध) प्रवीण त्रिपाठी ने कहा कि शिकायत मिलने के साथ ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी थी। पुलिस ने कानून के नियमों के अनुसार काम किया है। दोनों बहनों में से एक नाबालिग (१७ साल) की है। उसने एफीडेविट में अपनी उम्र १९ साल लिखाई थी। जांच में यह साबित होने के बाद कि वह १७ साल की है, पुलिस ने तुरंत उसे उसके पिता के घर पहुंचा दिया। दूसरी लडक़ी बालिग है। पुलिस के समक्ष उसने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है। वह माता-पिता के घर नहीं जाना चाहती, इसलिए पुलिस उसके मामले में चुप हो गई। जांच में पाया गया है कि दोनों बहने गैर-सम्प्रदाय के युवकों से प्रेम करती थीं और सुनियोजित ढंग से शादी की थी।
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हालांकि लड़कियों के पिता ने पुलिस के दावे को झूठा बताया है। पिता का कहना है कि पुलिस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। शुरू से ही मामले में पुलिस की भूमिका खराब रही है। उनकी बेटियों के साथ अत्याचार हुआ है। अंतिम सांस तक न्याय के लिए वे लड़ाई लड़ेंगे।
Published on:
02 Apr 2019 10:57 pm
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