20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कोलकाता

बंगाल के पूर्व मंत्री का मानवाधिकार संस्था पर निशाना

राज्य के पूर्व मंत्री पिछले एक साल से सुर्खियों में हैं। तृणमूल कांग्रेस के महासचिव रहे पार्थ चटर्जी ने सोमवार को राज्य मानवाधिकार संस्था पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उचित सुनवाई के बिना वे एक साल से अधिक समय से सलाखों के पीछे हैं, जबकि मानवाधिकार संस्था कार्यकर्ता इस मामले में चुप हैं।

Google source verification

पिछले एक साल से इस वजह से हैं सुर्खियों में
कोलकाता. राज्य के पूर्व मंत्री पिछले एक साल से सुर्खियों में हैं। तृणमूल कांग्रेस के महासचिव रहे पार्थ चटर्जी ने सोमवार को राज्य मानवाधिकार संस्था पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उचित सुनवाई के बिना वे एक साल से अधिक समय से सलाखों के पीछे हैं, जबकि मानवाधिकार संस्था कार्यकर्ता इस मामले में चुप हैं।
पार्थ ने मानवाधिकार कार्यकर्ता सुजात भद्र की ओर इशारा किया। भद्र विचाराधीन राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले एक अग्रणी चेहरा हैं। महानगर की एक विशेष अदालत में पेश किए जाने के बाद मीडियाकर्मियों से बात करते हुए पार्थ चटर्जी ने मानवाधिकार संस्था की भूमिका की आलोचना की। ईडी ने पूर्व मंत्री को राज्य के करोड़ों रुपए के स्कूल भर्ती घोटाले में कथित संलिप्तता के आरोप में पिछले साल 23 जुलाई को गिरफ्तार किया था।

वे लोग कहां, जो करते हैं रिहाई की मांग
चटर्जी ने पूछा कि वे लोग कहां हैं, सुजात भद्र कहां हैं? जो विचाराधीन राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग करते हैं? मैं एक साल से अधिक समय से बिना उचित सुनवाई के सलाखों के पीछे हूं। वे मेरे बारे में आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं? मुकदमे के बारे में पूछे जाने पर पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि उन्हें जांच और पूछताछ के नाम पर अनावश्यक रूप से हिरासत में लिया गया है।

इनका पलटवार
दूसरी तरफ भद्र ने कहा कि पार्थ चटर्जी किसी राजनीतिक गतिविधि के लिए कैदी नहीं बने हैं। चटर्जी को किसी राजनीतिक साजिश के शिकार के रूप में कैद नहीं किया गया है। एपीडीआर के महासचिव रंजीत सूर ने कहा कि अगर चटर्जी निर्दोष हैं, तो उन्हें मुकदमे के अंत में रिहा कर दिया जाएगा।