गंगासागर मेला 2023 खत्म हो गया है। आठ दिनों तक चले मेले में 71 लाख से ज्यादा लोगों ने पुण्य स् नान किया। देश के कोने कोने से श्रद्धालु यहां पहुंचे। वहीं अलग अलग अखाड़ो ंके साधु संतों ने भी यहां धूनी रमाई। पेश है आयोजन, आयोजनस्थल से जुड़ी चुनिंदा तस्वीरें। पुण्य स्नान के विहंगम दृश्य से लेकर आयोजनस्थल की व्यापकता जिसने भी ध्यान खींचा उस तस्वीर को यहां प्रस्तुत किया जा रहा है।
कपिल मुनि के मंदिर और आश्रम की रंगबिरंगी लाइटों से जगमगाती तस्वीर
अलग- अलग अखाड़ों के साधु, साध्वियों का स्नान, डुबकी मारकर बाहर निकलने पर जटाओं से निकलता पानी का अद्भुत दृश्य सबको रोमांचित करता है।
मेला स्थल पर आए नागा बाबा भी आकर्षण का केन्द्र रहते हैं। शरीर पर धूनी लपेटे नागा बाबा लोगो को आर्शीवाद देते हैं। वहीं स् नान स्थल पर साधु पारंपरिक वाद्य यंत्र के साथ लोगों का ध्यान खींचते हैं।
पुण्य स् नान के समय सूर्योपासना की जाती है। जो देखने में मनोहारी होती है।
आठ दिनों में आए 71 लाख लोग जब तट पर पुण्य दीर्घव्यावी तट पर स्नान करने पहुंचते हैं तो एक ओर जनसमुद्र और दूसरी ओर साक्षात सागर दिखाई देता है।
चारों तरफ से घिरे सागरद्वीप की जब ड्रोन से तस्वीर ली गई तो नजारा कुछ ऐसा दिखाई दिया।
मकर संक्राति पर गोदान की परंपरा निभाई जाती है। गंगासागर में आए श्रद्धालु गो दान कर पुण्य लाभ कमाते हैं।
किसी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तट पर विशेष रूप से प्रशिक्षत स्वान दस्ता भी तैनात रहता है।
पुण्य स्नान का लाभ लेने के लिए लोगों को नौका से नदी पा करनी पड़ती है। नदी का यह सफर अमूमन ४० मिनटों का होता है।