
Gangasagar Mela 2023: पल- पल परवर्तित प्रकृति रूप, गंगासागर तट से लाइव
कोलकाता
घड़ी में अभी रात के बारह नहीं बजे थे। कपिल मुनि आश्रम के सामने रोड क्रमांक - दो में गुरुवार की रात एलईडी व लेजर लाइटों का रंग बिरंगा प्रकाश जबआहिस्ता -आहिस्ता धुंधला होने लगा तो सहज कौतूहल के साथ चारों तरफ से आ रहे कुहासे ने ध्यान खींचा। कुछ ही सेकेंडो में विजिबिल्टी पचास मीटर से कम हो गई। गर्म कपड़ों में ढंके लोग, प्लास्टिक की शीट ओढ़कर सोते तीर्थयात्रियों को तो इस औचक परिवर्तन की भनक तक नहीं लगी होगी लेकिन दो नंबर सड़क के सागर तट से संयोग स्थल पर जमा हुए श्रद्धालुओं का कौतूहल प्रकृति के एक और आश्चर्यजनक परिवर्तन की ओर था। यहां तट का जलस्तर रात १.३५ बजे ४.१९ मीटर की सर्वाधिक ऊंचाई छूने को तैयार था। रात बारह बजे के बाद तट से टकराने वाली हर लहर जलस्तर के बढ़ने की पुष्टि कर रही थी। तट से सैकड़ों मीटर दूर लहरों के तट से टकराने की आवाज स्प्ष्ट सुनी जा रही थी। तट के आसपास रेतियों की बोरी से तैयार की गई दीवारें कांपने लगतीं तो देश भर से आए तीर्थयात्री अपने अपने समूहों को अपने अपने अनुभव बताने लगते। अनुभवों की गठरी खुली तो मध्यप्रदेश के अमरकंटक से आए सौरेश गुप्ता ने बताया कि उन्हें यह तो पता है कि सागर में तट पर पानी घटता बढ़ता है। उन्होंने यह भी सुना है कि कपिल मुनि आश्रम का पुरातन मंदिर जल में समा गया है। उनके अनुभव को भूगोल की भाषा में ज्वार और भाटे का परिणाम कहा जाता है। जिसमें ज्वार के समय सागर की लहरें उसके तट को आगे बढ़ा देती हैं और भाटे में जलस्तर कम हो जाता है। प्रकृति के बहुत से परिवर्तन आंखों से नहीं दिखते लेकिन गंगासागर में ज्वार और भाटे का पूरा घटनाक्रम दिखाई देता है। सागरतट पर जहां तीर्थयात्री स्नान करते हैं वह क्षेत्र ज्वार के समय लहरों की आगोश में चला जाता है। स्नान क्षेत्र में ज्वार के पीक समय पर १२ से १५ फीट पानी भर जाता है।
गंगासागर मेला प्रबंधन समिति के मुताबिक सभी एजेंसियों को ज्वार के पीक समय में बढ़े हुए जलस्तर की जानकारी पहले से ही दी जाती है। तट में भीड़ प्रबंधन में लगी अलग-अलग एजेंसियां समय सारिणी के हिसाब से प्रबंधन करती हैं। लेकिन कोहरे का यहां अनुमान लगाना ठेढ़ी खीर है। सर्दी के मौसम में रात के समय कुहासा कब छाएगा कब छंटेगा इसका अनुमान कठिन है। विजिबिल्टी कम होने से लांच और वेसल के संचालन पर असर पड़ता है। कुहासे के कारण शुक्रवार की रात से ही गंगासागर मेले की लांच और वेसल सेवा प्रभावित हुई। मेला स्थल पर बार बार उद़्घोषणा भी की गई कि जेटी की ओर यात्री न जाएं लांच सेवा बंद है। सुबह नौ बजे कुहासा छंटते ही वेसल, लांच सेवा शुरु हो पाई।
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सूर्योदय से पहले कम हुआ जलस्तर
इधर, गंगासागर तट पर पौ फटने की बाट जोह रहे लाखों श्रद्धालु गठरी समेटे पानी घटने का इंतजार करते रहे। सुबह होते ही स्नान क्षेत्र का जलस्तर कम होता गया। एक नंबर से लेकर पांच नंबर सड़क और सागर के संयोग स्थल पर दलदल के कब्जे से पुण्य स्नान के लिए आए तीर्थयात्रियों को समस्याएं भी हुईं।
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दीप, पुष्प, नारियल से पूजे गए देवी- देवता
सागर तट पर लाखों श्रद्धालु दीप, पुष्प और नारियल से मां गंगा व सागर की पूजा में तल्लीन रहे। सर्द हवाओं के बीच मिलन स्थल पर स्नान के बाद दान पुण्य भी किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने गोदान की परंपरा का भी पालन किया।
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औघड़, साधु-साध्वियों की तट यात्रा
सागर तट पर अलग-अलग अखाड़ों से जुड़े साधु साध्वियों के समूह को भी देखा गया।
जूना अखाड़े से जुड़े अघोर साधु ने बताया कि गंगासागर में मकर संक्राति पर अखाड़ों के शाही स्नान की परंपरा नहीं है। साधु भी यहां तीर्थयात्री दान पुण्य जैसे धार्मिक आवश्यक्ताओं के कारण ही आते हैं।किन्नर साधु भी यात्रा पर आए दिखाई दिए।
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बछिया की पूंछ पकड़ी और मिल गया गो-दान का पुण्य
मकर संक्रांति पर दान पुण्य की परंपरा का पालन करने वाले तीर्थयात्री मेला-स्थल पर गो-दान, अन्न दान, दीपदान करते देखे गए। श्रद्धालुओं के दान के लिए बछिया भी सागर तट पर हाजिर हो गईं। उनकी पूछ पकड़कर श्रद्धालुओं ने वैतरणी पार करने के संकल्प दोहराए।
----दस हजार से ज्यादा स्वयंसेवक, 14 हजार पुलिस कर्मी
मेला स्थल पर 140 स्वयं सेवी संस्थाओं के दस हजार से ज्यादा कार्यकर्ता अलग-अलग सेवा कायोZं में लगे हुए हैं। सुरक्षा का जिम्मा 14 हजार पुलिस कर्मी संभाल रहे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में सिविक वालेंटियर समेत विशेषज्ञ बलों के जवान, एनडीआरएफ का आपदा रोधी दस्ता, बम डिस्पोजल स्क्वाॅयड व अन्य सुरक्षा एजेंिसयों से जुड़े कर्मी तैनात किए गए हैं।
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जुगनू की अम्मा जहां कहीं हों
मेला हो और भूला -पाया विभाग की उद् घोषणाएं ध्यान न खींचे ऐसा नहीं हो सकता है। इसलिए मेला स्थल पर दिन रात जारी उद्घोषणाओं में से बहुत से
> Paritosh Dubey:
बहुत से रोचक तरीके से सामने रखी जाती हैं।
उद्घोषणा से जुड़े कार्यकर्ता के मुताबिक हिंदी पट्टी से आए धार्मिक पर्यटकों में महिलाएं अभी भी पति का नाम कहने में परहेज करती हैं। इसलिए जब उनके लिए माइक पकड़्ना पड़्ता है तो उनके पुत्रों के नाम से उनका परिचय देना होता है।
- इस्कॉन में 15 देशों के साठ कार्यकर्ता
इस्कॉन के अंतरराष्ट्रीय केन्द्रों से 60 कार्यकता गंगासागर मेले में आए हुए हैं। जो संगठन के साहित्य का संगीतमय, कीर्तनमय प्रचार में लगे हुए हैं। रूस से आए इस्कॉन कार्यकर्ता ने बताया कि प्रभु पाद रचित साहित्य मानवता की पूंजी है।
Published on:
14 Jan 2023 02:22 pm
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