
परमात्मा ही सच्चा साथी--शास्त्री
कोलकाता. केवल धन-दौलत, यश-वैभव देखकर मित्रता करना मित्रता नहीं, बल्कि जो दुख में साथ निभाए, संकट में काम आए वही सच्चा मित्र है। आज भी लोग भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता को याद करते हैं लेकिन आश्चर्य तो तब होता है जब लोग इसका अनुशरण नहीं करते। भागवत मर्मज्ञ गोभक्त पं. मालीराम शास्त्री ने यह बात कही। बंगेश्वर महादेव मंदिर में असहाय वृद्धों, गोमाताओं की सेवार्थ भागवत जन-कल्याण ट्रस्ट की ओर से आयोजित भागवत महापुराण यज्ञ में शास्त्री ने कहा कि इस नश्वर संसार में केवल परमात्मा ही सच्चा साथी है और बाकी सब मतलब की मित्रता। राजारहाट के पाथेरघाटा में संस्थापित ‘ममता का मंदिर’ गोशाला संचालन के लिए दिनेश-लक्ष्मी, संजय-मीनू अग्रवाल के मुख्य यजमानत्व, सत्यनारायण खेतान, सुभाष-पुष्पा अग्रवाल के संरक्षकत्व में आयोजित भागवत महापुराण यज्ञ के समापन दिवस की कथा करते हुए उन्होंने कहा कि जब किसी का किसी से स्वार्थ सधता है तब तक मित्रता रहती है उसके बाद कोई मतलब नहीं रहता। शास्त्री ने कहा कि भागवत् कहती है कि मानव को सदैव यह विचार रखने चाहिये कि मैं न कत्र्ता और न भोक्ता हूं। इस सिद्धांत के आधार पर चलने वाले व्यक्ति का मन सदैव शक्तिशाली रहता है। भागवत् भगवान की साक्षात् वांगमयी प्रतिमूर्ति है। भागवत् श्रवण करते समय चित्त से समस्त विकारों को दूर रखना चाहिये। क्योंकि इसके लिये मन की स्थिरता का होना नितांत जरूरी है। मनुष्य को सदैव स्मरण रखना चाहिये कि वह सिर्फ माध्यम है कत्र्ता तो कोई अद्वितीय अदृश्य शक्ति है जो उससे कार्य करवा रही है। कथा को विराम देते हुए शास्त्री ने कथा आयोजन में सहयोग के लिए दिनेश-रश्मि अग्रवाल, सुरेन्द्र-सीमा पटवारी, अशोक-प्रेमलता शाह, संजय-हंसा अग्रवाल, मधुसूदन-सुनीता बूबना, सजन-रेणू तायल, दिलीप चौधरी, सुशील गोयनका, शेषनाथ पाठक आदि को शुभाशीष प्रदान किया। मीडिया प्रभारी सुरेश कुमार भुवालका ने संचालन, धन्यवाद ज्ञापित किया। पूर्णाहूति यज्ञ, प्रसाद के साथ आयोजन सम्पन्न हुआ।
Published on:
21 Nov 2018 10:28 pm
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